हरियाली के सच्चे प्रहरी: कुंज बिहारी जी ने बंजर भूमि को बनाया फल-फूल और औषधीय पौधों का जीवंत संसार,2007 में शुरू की थी नर्सरी, आज हजारों पेड़-पौधों से महक रहा क्षेत्र; पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल बने कुंज बिहारी जी
कलयुग की कलम से राकेश यादव

हरियाली के सच्चे प्रहरी: कुंज बिहारी जी ने बंजर भूमि को बनाया फल-फूल और औषधीय पौधों का जीवंत संसार,2007 में शुरू की थी नर्सरी, आज हजारों पेड़-पौधों से महक रहा क्षेत्र; पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल बने कुंज बिहारी जी
कलयुग की कलम सिलौंडी – जहां एक ओर बढ़ते शहरीकरण और विकास की दौड़ में पेड़ों की कटाई चिंता का विषय बनी हुई है, वहीं सिलौंडी क्षेत्र के ग्राम पंचायत घाना के सचिव एवं अतरसूमा पंचायत के अतिरिक्त प्रभार का दायित्व संभाल रहे श्री कुंज बिहारी जी पर्यावरण संरक्षण की एक प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत कर रहे हैं।
वर्ष 2007 में उन्होंने अपने प्रयासों से एक नर्सरी विकसित करने का संकल्प लिया था। वर्षों की मेहनत, समर्पण और प्रकृति के प्रति अटूट प्रेम का परिणाम है कि आज यह नर्सरी हरियाली से लहलहा रही है। यहां लगभग 2500 से 3000 पेड़-पौधे विकसित हो चुके हैं, जिनसे विभिन्न प्रकार के फल, फूल एवं औषधीय पौधों का लाभ क्षेत्रवासियों को मिल रहा है।
नर्सरी में विकसित हरियाली न केवल पर्यावरण संतुलन को मजबूत कर रही है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। स्थानीय लोगों के लिए यह स्थान प्रकृति से जुड़ाव और पर्यावरणीय जागरूकता का केंद्र बन चुका है।
श्री कुंज बिहारी जी का मानना है कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ वे लगातार वृक्षारोपण, जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के कार्यों से लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।
आज जब पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां पूरी दुनिया के सामने हैं, तब कुंज बिहारी जी जैसे लोगों के प्रयास समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनके द्वारा विकसित की गई हरियाली आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण और बेहतर भविष्य का संदेश दे रही है।
प्रेरणा का संदेश
“एक पेड़ केवल पौधा नहीं, बल्कि आने वाले कल की सांस है। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में कुछ पौधे लगाकर उनका संरक्षण करे, तो धरती को फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है।”
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कुंज बिहारी जी का यह योगदान निश्चित रूप से समाज के लिए अनुकरणीय है और यह संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और प्रकृति प्रेम से असंभव लगने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।



