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डाक विभाग के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का राष्ट्रव्यापी बिगुल: काली पट्टी बांधकर शुरू हुआ आंदोलन,’टारगेट’ के नाम पर शोषण का आरोप, मांगें नहीं मानी गईं तो 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

कलयुग की कलम से राकेश यादव

डाक विभाग के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का राष्ट्रव्यापी बिगुल: काली पट्टी बांधकर शुरू हुआ आंदोलन,‘टारगेट’ के नाम पर शोषण का आरोप, मांगें नहीं मानी गईं तो 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

कलयुग की कलम सिलौंडी – भारतीय डाक विभाग कर्मचारी संघ ने डाक विभाग के कथित निजीकरण, कर्मचारियों पर बढ़ते कार्यदबाव और विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन का आगाज कर दिया है। आंदोलन के पहले चरण में कर्मचारी 20 से 27 जुलाई तक काली पट्टी बांधकर अपनी सेवाएं देते हुए विरोध दर्ज करा रहे हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।

संभागीय सचिव अनिल सिंह बागरी ने बताया कि विभाग में लागू की जा रही नई कार्यप्रणालियों के कारण कर्मचारियों पर अनावश्यक लक्ष्य (टारगेट) का दबाव बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि ग्रामीण डाक सेवकों और विभागीय कर्मचारियों से विभिन्न योजनाओं के लक्ष्य पूरे कराने के लिए व्यक्तिगत स्तर तक दबाव बनाया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में मानसिक और आर्थिक तनाव बढ़ रहा है।

चार चरणों में चलेगा आंदोलन

संघ द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 20 से 27 जुलाई तक सभी डाकघरों में कर्मचारी काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे। इसके बाद 28 जुलाई को मंडलीय कार्यालयों में दोपहर के अवकाश के दौरान प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। 5 अगस्त को प्रदेशभर में एक दिवसीय हड़ताल होगी। यदि इसके बाद भी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।

ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

डाक कर्मचारी संघ ने टारगेट आधारित कार्यप्रणाली को समाप्त करने, रेल डाक सेवा को पुनः शुरू करने, मेल मोटर विभाग सहित रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, विभाग में भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई, कैडर रिव्यू एवं विकेंद्रीकरण संबंधी प्रस्तावों पर पुनर्विचार, भूतपूर्व सैनिक कोटे से नियुक्त कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों का निराकरण, वर्तमान एनडीसी/आईडीसी डिलीवरी व्यवस्था समाप्त कर पुरानी डाक वितरण प्रणाली बहाल करने तथा 17 दिसंबर को राष्ट्रीय श्रम दिवस घोषित करने की मांग उठाई है।

संघ का कहना है कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सार्वजनिक डाक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भी चलाया जा रहा है। कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर सकारात्मक समाधान निकालेगी, जिससे आंदोलन को आगे बढ़ाने की आवश्यकता न पड़े।

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