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बाढ़ से जंग के लिए तैयार हुए ‘जल प्रहरी’कटनी में आपदा प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण, मछुआरा समिति के 100 सदस्यों को सिखाए गए बचाव और राहत के गुर

कलयुग की कलम से राकेश यादव

बाढ़ से जंग के लिए तैयार हुए ‘जल प्रहरी’कटनी में आपदा प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण, मछुआरा समिति के 100 सदस्यों को सिखाए गए बचाव और राहत के गुर

कलयुग की कलम कटनी – आगामी वर्षा ऋतु और संभावित बाढ़ की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जिले में आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सिविल डिफेंस कटनी द्वारा ‘बाढ़ आपदा प्रबंधन’ विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मछुआरा समिति के लगभग 100 सदस्यों ने सहभागिता कर आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की बारीकियां सीखीं।

होमगार्ड कार्यालय झिंझरी में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन मध्यप्रदेश आपदा प्रबंधन संस्थान के निर्देशानुसार किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डिप्टी कलेक्टर श्रीमती विंकी सिंहमारे तथा तहसीलदार एवं प्रभारी राहत शाखा सुश्री नेहा जैन उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के पूजन के साथ किया गया। अतिथियों का स्वागत डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट राजेन्द्र सिंह बघेल एवं प्लाटून कमांडर विजयांश चौधरी द्वारा किया गया।

आपदा के समय कैसे बचाएं जान, दिए गए व्यावहारिक सुझाव

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बाढ़ की स्थिति में अपनाई जाने वाली सावधानियों, त्वरित राहत कार्यों, सुरक्षित निकासी, बचाव तकनीकों तथा जनसहयोग की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि आपदा के समय सही निर्णय और त्वरित प्रतिक्रिया कई लोगों की जान बचा सकती है।

अनुभवी प्रशिक्षकों ने साझा किया मैदानी अनुभव

कार्यक्रम में सिविल डिफेंस कटनी के सेवानिवृत्त सीडीआई आर.पी. त्रिपाठी एवं सेवानिवृत्त होमगार्ड तिलकेश्वर परौहा ने प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने अपने लंबे अनुभव के आधार पर प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों की रणनीतियों से अवगत कराया।

आपदा से निपटने में समाज की भूमिका अहम

प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। मछुआरा समिति के सदस्यों को जल क्षेत्रों में उनकी विशेषज्ञता के कारण आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण सहयोगी बताया गया।

जिले में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल आपदा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बना, बल्कि बाढ़ जैसी आपात परिस्थितियों में प्रभावी राहत एवं बचाव कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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