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नशामुक्ति अभियान पर अवैध शराब का करारा वार!गांव-गांव बिक रही पैकारी, मजदूर परिवार तबाह—आखिर जिम्मेदार कौन?उमरियापान क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब बिक्री पर उठे गंभीर सवाल, सामाजिक ताने-बाने और नई पीढ़ी पर पड़ रहा गहरा असर

कलयुग की कलम से राकेश यादव

नशामुक्ति अभियान पर अवैध शराब का करारा वार!गांव-गांव बिक रही पैकारी, मजदूर परिवार तबाह—आखिर जिम्मेदार कौन?उमरियापान क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब बिक्री पर उठे गंभीर सवाल, सामाजिक ताने-बाने और नई पीढ़ी पर पड़ रहा गहरा असर

विशेष रिपोर्ट 

कलयुग की कलम उमरिया पान – सरकार और पुलिस प्रशासन एक ओर नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उमरियापान से लगे कई ग्रामीण क्षेत्रों में कथित रूप से अवैध शराब की पैकारी का कारोबार बेखौफ जारी होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक अवैध शराब के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक नशामुक्ति अभियान केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।

ग्रामीणों के अनुसार गांवों में मजदूरी करने वाला गरीब व्यक्ति दिनभर खेतों में धान रोपाई, निर्माण कार्य या अन्य मेहनत-मजदूरी कर जो कमाई करता है, उसका बड़ा हिस्सा शाम होते-होते शराब में खर्च हो जाता है। परिणामस्वरूप परिवार आर्थिक संकट में फंस जाता है, बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है और घरों में विवाद बढ़ने लगते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब के नशे में आए दिन मारपीट, गाली-गलौज और पारिवारिक झगड़े जैसी घटनाएं सामने आती हैं। इससे गांवों का सामाजिक वातावरण लगातार बिगड़ रहा है। सबसे अधिक चिंता इस बात की है कि बच्चे और छात्र-छात्राएं रोज ऐसे माहौल को देख रहे हैं, जिससे उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्थानों पर अवैध शराब की उपलब्धता इतनी आसान हो गई है कि लोगों को इसके लिए दूर जाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती। यदि इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर प्रभावी कार्रवाई की जाए तो अवैध कारोबार पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि केवल जागरूकता अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ-साथ अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री पर सख्त निगरानी तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है। तभी नशामुक्त समाज का उद्देश्य सार्थक हो सकेगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि गांव-गांव में कथित रूप से अवैध शराब की बिक्री जारी है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त है, या फिर जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई की भी उतनी ही आवश्यकता है?

क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री की निष्पक्ष जांच कर नियमित अभियान चलाया जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि गांवों में शांति, सुरक्षा और स्वस्थ सामाजिक वातावरण कायम रह सके।

(नोट: यह रिपोर्ट क्षेत्रीय लोगों द्वारा व्यक्त शिकायतों और जनचिंताओं पर आधारित है। संबंधित विभाग का पक्ष प्रकाशित होने पर उसे भी प्रमुखता से स्थान दिया जाएगा।)

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