बेटियां पढ़ेंगी तभी बढ़ेगा समाज, छात्रावास निर्माण में देरी पर उठ रहे सवाल” 2.41 करोड़ का छात्रावास सिर्फ फाइलों में कैद! आखिर कब मिलेगा आदिवासी बेटियों को शिक्षा का सुरक्षित आशियाना,चार साल बाद भी शुरू नहीं हुई निर्माण प्रक्रिया, छात्रावास की कमी से पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रहीं छात्राएं
कलयुग की कलम से राकेश यादव

बेटियां पढ़ेंगी तभी बढ़ेगा समाज, छात्रावास निर्माण में देरी पर उठ रहे सवाल” 2.41 करोड़ का छात्रावास सिर्फ फाइलों में कैद! आखिर कब मिलेगा आदिवासी बेटियों को शिक्षा का सुरक्षित आशियाना,चार साल बाद भी शुरू नहीं हुई निर्माण प्रक्रिया, छात्रावास की कमी से पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रहीं छात्राएं
कलयुग की कलम सिलौंडी – आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार और बेटियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं की गति कई सवाल खड़े कर रही है। ऐसा ही मामला सिलौंडी क्षेत्र में सामने आया है, जहां वर्षों पूर्व स्वीकृत सीनियर कन्या छात्रावास का भवन आज भी निर्माण की प्रतीक्षा कर रहा है।
जानकारी के अनुसार सिलौंडी में सीनियर कन्या छात्रावास भवन के निर्माण के लिए वर्ष 2022 में लगभग 2 करोड़ 41 लाख रुपये की लागत से स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसके बावजूद अब तक न तो निर्माण कार्य शुरू हो सका है और न ही प्रक्रिया अपेक्षित गति पकड़ पाई है। परिणामस्वरूप क्षेत्र की अनेक छात्राओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष कई आदिवासी छात्राएं अच्छे अंकों से परीक्षा उत्तीर्ण करती हैं और आगे की पढ़ाई के लिए उत्साहित रहती हैं, लेकिन आवासीय सुविधा के अभाव में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। छात्रावास में सीमित सीटों के कारण कई छात्राओं को प्रवेश नहीं मिल पाता, जिससे उनकी उच्च शिक्षा प्रभावित होती है।
क्षेत्र के नागरिकों का मानना है कि छात्रावास भवन का निर्माण समय पर हो जाता तो दूर-दराज के गांवों की छात्राओं को सुरक्षित आवास, भोजन और अध्ययन का बेहतर वातावरण उपलब्ध हो सकता था। वर्तमान स्थिति में अनेक छात्राओं को शिक्षा जारी रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
स्थानीय जागरूक नागरिकों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि सीनियर कन्या छात्रावास भवन निर्माण की प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र कार्य प्रारंभ कराया जाए, ताकि आदिवासी बेटियों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें और उनका भविष्य सुरक्षित बनाया जा सके।



