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कलेक्टर की जिलेवासियों से अपील, मिट्टी के दीये खरीदकर रोशन करें कारीगरों के घर, जरूरतमंदों के साथ बांटें दीपावली की खुशियां,वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने का किया आह्वान, पर्यावरण अनुकूल और सुरक्षित दीपावली मनाने की अपील; ग्रीन पटाखों के उपयोग और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पटाखों पर प्रतिबंध का पालन करने की दी सलाह

कलयुग की कलम से राकेश यादव

कलेक्टर की जिलेवासियों से अपील, मिट्टी के दीये खरीदकर रोशन करें कारीगरों के घर, जरूरतमंदों के साथ बांटें दीपावली की खुशियां,वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने का किया आह्वान, पर्यावरण अनुकूल और सुरक्षित दीपावली मनाने की अपील; ग्रीन पटाखों के उपयोग और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पटाखों पर प्रतिबंध का पालन करने की दी सलाह

कलयुग की कलम कटनी – दीपावली का पर्व केवल घरों को दीपों से सजाने और रोशनी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दूसरों के जीवन में खुशियों का उजाला फैलाने, आपसी प्रेम और भाईचारे को मजबूत करने का भी संदेश देता है। इसी भावना के साथ कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने जिलेवासियों को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि इस बार दीपावली पर स्थानीय कारीगरों के हुनर को सम्मान दें और जरूरतमंद परिवारों के साथ भी त्योहार की खुशियां साझा करें।

कलेक्टर श्री तिवारी ने कहा कि दीपावली अंधकार पर प्रकाश और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक है। यह पर्व हमें सकारात्मकता, स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए परिवार के साथ स्वच्छ, सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाने का आग्रह किया। साथ ही ध्वनि उत्पन्न करने वाले पटाखों के उपयोग पर रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लागू प्रतिबंध का पालन करने, केवल ग्रीन पटाखों का उपयोग करने तथा विद्युत सुरक्षा सहित अन्य आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की।

मिट्टी के दीयों से जगमगाएं घर, स्थानीय हुनर को मिले सम्मान

कलेक्टर ने वोकल फॉर लोकल और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिले के कुम्हार अपने हुनर से मिट्टी के आकर्षक दीये तैयार करते हैं, वहीं महिला स्वसहायता समूहों द्वारा पूजन सामग्री, पूजा बाती और सजावटी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। दीपावली की खरीदारी में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर इन कारीगरों और महिलाओं की मेहनत को प्रोत्साहित किया जा सकता है। मिट्टी के दीयों का उपयोग न केवल हमारी परंपरा और संस्कृति को जीवंत रखता है, बल्कि स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है।

जरूरतमंदों के घर भी पहुंचे खुशियों का उजाला

कलेक्टर श्री तिवारी ने सामाजिक संवेदनशीलता का संदेश देते हुए कहा कि खुशियां बांटने से बढ़ती हैं। दीपावली का वास्तविक आनंद तभी है, जब समाज के वंचित और जरूरतमंद परिवार भी इस पर्व को उत्साह के साथ मना सकें। उन्होंने जिलेवासियों से अपने आसपास रहने वाले जरूरतमंद परिवारों की मदद करने, उनके साथ मिठाइयां और खुशियां साझा करने तथा उनके जीवन में भी दीपावली का उजाला पहुंचाने की अपील की।

संदेश स्पष्ट है—इस दीपावली अपने घर के साथ किसी जरूरतमंद के घर में भी खुशियों का दीप जलाएं और स्थानीय हुनर को प्रोत्साहन देकर त्योहार को सार्थक बनाएं।

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