पंचायत कार्यालयों पर सीईओ का औचक निरीक्षण, कुर्सियां खाली मिलीं तो पांच कर्मचारियों को थमाया नोटिस! बहोरीबंद की जुझारी, तिगवां, अमरगढ़ और मवई पंचायतों में लापरवाही उजागर, सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों से तीन दिन में मांगा जवाब; संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
कलयुग की कलम से राकेश यादव

पंचायत कार्यालयों पर सीईओ का औचक निरीक्षण, कुर्सियां खाली मिलीं तो पांच कर्मचारियों को थमाया नोटिस! बहोरीबंद की जुझारी, तिगवां, अमरगढ़ और मवई पंचायतों में लापरवाही उजागर, सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों से तीन दिन में मांगा जवाब; संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
कलयुग की कलम कटनी – सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और पंचायत कार्यालयों से नदारद रहने वाले कर्मचारियों पर जिला पंचायत प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। बहोरीबंद विकासखंड की ग्राम पंचायतों में शासकीय कार्यों के प्रति उदासीनता और कार्यालयीन अनुशासन की अनदेखी सामने आने पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सुश्री हर सिमरनप्रीत कौर ने पांच कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिवस के भीतर जवाब मांगा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत जुझारी के सचिव तुलसीराम पटेल एवं ग्राम रोजगार सहायक अजय पाल, ग्राम पंचायत तिगवां के सचिव कमल झरिया एवं ग्राम रोजगार सहायक सनत पटेल तथा ग्राम पंचायत अमरगढ़ एवं मवई के सचिव गोविंद पटेल को नोटिस जारी किए गए हैं।
दरअसल, जिला पंचायत के सहायक परियोजना अधिकारी द्वारा किए गए क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान जुझारी और तिगवां ग्राम पंचायतों के संबंधित सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायक कार्यालय में अनुपस्थित मिले। स्थिति यह रही कि पंचायत कार्यालय भी बंद पाए गए। कर्मचारियों की गैरमौजूदगी के चलते प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवासों की पूर्णता की प्रगति की समीक्षा नहीं हो सकी। इसके अलावा व्हीबी-जी रामजी और स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जानकारी भी नहीं मिल पाई।
तीन दिन में जवाब नहीं तो होगी कार्रवाई
जिला पंचायत सीईओ ने इस स्थिति को शासकीय दायित्वों के प्रति गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण तलब किया है। नोटिस में तीन दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। निर्धारित समय में जवाब नहीं देने अथवा स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम, 1999 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई से पंचायत स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि कार्यालयों में नियमित उपस्थिति, शासकीय योजनाओं की प्रगति और हितग्राहियों को समय पर लाभ पहुंचाने में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



