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धान कटाई के ऐन वक्त हार्वेस्टर पर कार्रवाई से किसानों में हड़कंप, गेहूं की बुवाई पर संकट,एसएमएस सिस्टम नहीं तो हार्वेस्टर जब्त, कार्रवाई के डर से खेतों में नहीं पहुंच रहे हार्वेस्टर संचालक; कटाई में देरी से किसानों की बढ़ी चिंता

कलयुग की कलम से राकेश यादव

धान कटाई के ऐन वक्त हार्वेस्टर पर कार्रवाई से किसानों में हड़कंप, गेहूं की बुवाई पर संकट,एसएमएस सिस्टम नहीं तो हार्वेस्टर जब्त, कार्रवाई के डर से खेतों में नहीं पहुंच रहे हार्वेस्टर संचालक; कटाई में देरी से किसानों की बढ़ी चिंता

कलयुग की कलम उमरिया पान – धान कटाई के सीजन में हार्वेस्टर मशीनों में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) अनिवार्य किए जाने के बाद अब इसका असर किसानों के खेतों में दिखाई देने लगा है। नियमों का पालन नहीं करने पर उमरियापान क्षेत्र में पुलिस द्वारा हार्वेस्टर जब्त किए जाने की कार्रवाई से मशीन संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, कटाई के ऐन समय पर हो रही इस कार्रवाई से किसानों के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है। सोमवार को कई हार्वेस्टर संचालक किसानों के खेतों में कटाई करने नहीं पहुंचे, जिससे पककर तैयार खड़ी धान की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।

किसानों और हार्वेस्टर मालिकों ने पुलिस से एक-दो दिन की मोहलत देने तथा खेतों में खड़ी फसल की कटाई पूरी होने तक कार्रवाई रोकने का आग्रह किया, लेकिन कार्रवाई नहीं रोकी गई। इसके बाद हार्वेस्टर संचालकों में कार्रवाई का डर बढ़ गया है। किसानों को आशंका है कि यदि संचालक मशीनें लेकर क्षेत्र से चले गए तो धान की कटाई कराना मुश्किल हो जाएगा। इसका सीधा असर गेहूं की बुवाई पर पड़ेगा और समय पर बुवाई नहीं होने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

छोटे किसानों के सामने सबसे बड़ी परेशानी

हार्वेस्टर में एसएमएस सिस्टम लगाने की अनिवार्यता को लेकर किसानों के सामने कई व्यावहारिक सवाल भी खड़े हो रहे हैं। छोटे किसानों के खेतों में, जहां 20 डिसमिल या इससे कम जमीन है, वहां हार्वेस्टर के साथ पूरे सिस्टम का उपयोग कितना व्यावहारिक होगा? किसानों का कहना है कि धान की नरवाई में नमी रहने पर एसएमएस सिस्टम कैसे काम करेगा और ऐसी स्थिति में कटाई किस तरह होगी, इस पर भी स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है।

किसानों का कहना है कि खेतों में धान की फसल पककर तैयार है। मौसम की मार से पहले ही खेती प्रभावित हो रही है, ऐसे में कटाई के समय नए नियमों के चलते हार्वेस्टर संचालकों के पीछे हटने से परेशानी और बढ़ गई है। यदि समय पर कटाई नहीं हुई तो गेहूं की बुवाई में देरी होगी, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

किसान संघ ने भी जताई चिंता

ढीमरखेड़ा किसान संघ की ओर से भी इस स्थिति पर चिंता जताए जाने की जानकारी सामने आई है। किसानों का कहना है कि शासन-प्रशासन को पर्यावरण संरक्षण और नरवाई प्रबंधन के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे खेतों में खड़ी फसल का नुकसान न हो।

किसानों की मांग है कि प्रशासन हार्वेस्टर संचालकों और किसानों के लिए व्यावहारिक समाधान निकाले। कटाई के सीजन में ऐसी व्यवस्था हो कि नियमों का पालन भी हो और किसानों की फसल समय पर कट सके। यदि हार्वेस्टर संचालक कार्रवाई के डर से क्षेत्र छोड़कर चले गए तो किसानों के सामने धान कटाई का संकट खड़ा हो सकता है।

इनका कहना है

उमरियापान थाना प्रभारी महेंद्र जायसवाल ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर महोदय से निर्देश प्राप्त हुए हैं कि फसल कटाई करने वाले हार्वेस्टर मशीनों में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) लगा होना अनिवार्य है। खेतों में कटाई के दौरान नियमों का पालन नहीं मिलने पर लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई और जुर्माने के निर्देश हैं। इसी के पालन में पुलिस द्वारा कार्रवाई की जा रही है।

धान कटाई के महत्वपूर्ण समय में हार्वेस्टर पर कार्रवाई और संचालकों के खेतों में नहीं पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। अब किसानों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है कि क्या कटाई के सीजन को देखते हुए कोई व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे उनकी तैयार फसल समय पर कट सके और गेहूं की बुवाई प्रभावित न हो।

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