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बाल विवाह के खिलाफ बुलंद हुई आवाज: जिला पंचायत सीईओ ने दिलाई ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ की शपथ, बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा का दिलाया संकल्प,मिशन वात्सल्य के तहत जिला स्तरीय प्रशिक्षण में बाल सुरक्षा, शिक्षा, जेंडर समानता और बाल अधिकारों पर हुआ मंथन, अधिकारियों से निभाने को कहा सक्रिय भूमिका

कलयुग की कलम से राकेश यादव

बाल विवाह के खिलाफ बुलंद हुई आवाज: जिला पंचायत सीईओ ने दिलाई ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ की शपथ, बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा का दिलाया संकल्प,मिशन वात्सल्य के तहत जिला स्तरीय प्रशिक्षण में बाल सुरक्षा, शिक्षा, जेंडर समानता और बाल अधिकारों पर हुआ मंथन, अधिकारियों से निभाने को कहा सक्रिय भूमिका

कलयुग की कलम कटनी – बच्चों को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने मिशन वात्सल्य के अंतर्गत जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला स्तरीय प्रशिक्षण एवं कार्यशाला का आयोजन किया। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बाल सुरक्षा, बाल अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, जेंडर समानता और बाल विवाह रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति उसके बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वस्थ भविष्य पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह केवल सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मनिर्भर भविष्य के लिए गंभीर बाधा है। इसे रोकना प्रशासन, समाज और प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

‘बाल विवाह मुक्त भारत’ का दिलाया सामूहिक संकल्प

कार्यक्रम के दौरान सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर ने सभी प्रतिभागियों को ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ की शपथ दिलाई। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में बाल विवाह की रोकथाम, बाल अधिकारों के संरक्षण और बच्चों के लिए सुरक्षित एवं संवेदनशील वातावरण तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि जागरूक समाज और प्रभावी प्रशासनिक समन्वय से ही बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है तथा प्रत्येक बच्चे को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन का अधिकार सुनिश्चित किया जा सकता है।

जेंडर समानता और कानूनी प्रावधानों पर विशेष जोर

कार्यशाला में शासकीय कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात ने कहा कि जेंडर समानता ही समावेशी और प्रगतिशील समाज की आधारशिला है। उन्होंने बालिकाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने और लैंगिक भेदभाव समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया।

महिला एवं बाल विकास विभाग की सहायक संचालक वनश्री कुवैती ने बाल विवाह निषेध से जुड़े कानूनी प्रावधानों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी दी। वहीं बाल संरक्षण अधिकारी मनीष तिवारी ने पॉक्सो अधिनियम, बाल संरक्षण तंत्र तथा बच्चों के अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया।

बहु-विभागीय समन्वय से मजबूत होगी बाल संरक्षण व्यवस्था

प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने बाल सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया और इस बात पर जोर दिया कि प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से ही बच्चों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों के प्रति संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना और समाज में जागरूकता बढ़ाना रहा।

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