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23 साल से सिहोरा की आंखों में जिला बनने का सपना, आज भी अधूरा! 1 अक्टूबर 2003 को मिली थी कैबिनेट की मंजूरी, 23 साल बाद भी नहीं मिला जिले का दर्जा,सरकारें बदलीं, मध्यप्रदेश में नए जिले बने, लेकिन सिहोरा आज भी अपने फैसले का इंतजार कर रहा

कलयुग की कलम से राकेश यादव

23 साल से सिहोरा की आंखों में जिला बनने का सपना, आज भी अधूरा! 1 अक्टूबर 2003 को मिली थी कैबिनेट की मंजूरी, 23 साल बाद भी नहीं मिला जिले का दर्जा,सरकारें बदलीं, मध्यप्रदेश में नए जिले बने, लेकिन सिहोरा आज भी अपने फैसले का इंतजार कर रहा

कलयुग की कलम सिहोरा – सिहोरा को जिला बनाने की मांग कोई नई मांग नहीं है। यह करीब 23 वर्ष पुराना सपना है, जो आज भी पूरा होने का इंतजार कर रहा है। 1 अक्टूबर 2003 का दिन सिहोरा के लोगों के लिए उम्मीद लेकर आया था, जब मध्यप्रदेश सरकार की कैबिनेट ने सिहोरा जिला बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद समय बीतता गया, सरकारें बदलीं, मुख्यमंत्री बदले और प्रदेश में नए जिले अस्तित्व में आते रहे, लेकिन सिहोरा को जिले का दर्जा नहीं मिल सका।

सिहोरा जिला आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, 11 जुलाई 2003 को मध्यप्रदेश सरकार के राजपत्र में सिहोरा, मझौली, बहोरीबंद और ढीमरखेड़ा को मिलाकर नया जिला बनाए जाने का प्रस्ताव सामने आया था। इसके बाद 1 अक्टूबर 2003 को कैबिनेट से प्रस्ताव को मंजूरी मिली। उस समय मध्यप्रदेश में 48 जिले थे, जबकि वर्तमान में प्रदेश में 55 जिले हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि 2003 के बाद सात नए जिले अस्तित्व में आए, लेकिन सिहोरा की मांग अब तक लंबित है।

कैबिनेट मंजूरी के बाद भी 23 साल का इंतजार

2003 में कैबिनेट की मंजूरी के बाद सिहोरा के लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही जिला गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। लेकिन यह उम्मीद धीरे-धीरे लंबे इंतजार में बदल गई। दो दशक से अधिक समय गुजरने के बाद भी जिला गठन का सपना पूरा नहीं हुआ।

लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति का सवाल है कि जब प्रदेश में नए जिलों के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही, तो सिहोरा के मामले में निर्णय अब तक क्यों लंबित है। समिति इस मांग को लेकर लगातार आंदोलन, धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और जनसंवाद के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करती रही है।

सरकारें बदलीं, जिले बने, सिहोरा इंतजार करता रहा

आंदोलनकारियों का कहना है कि वर्ष 2003 के बाद मध्यप्रदेश के प्रशासनिक नक्शे में कई बदलाव हुए और नए जिले बनाए गए। ऐसे में सिहोरा के लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि पुराने प्रस्ताव और कैबिनेट मंजूरी के बावजूद जिले का गठन अब तक क्यों नहीं हो सका।

समिति से जुड़े लोगों के अनुसार, पिछले करीब पांच वर्षों से आंदोलन लगातार जारी है। मुख्यमंत्री से दो बार वार्ता होने का भी दावा किया गया है। हालांकि, इन संवादों के बावजूद सिहोरा जिला गठन की मांग अब तक पूरी नहीं हुई है।

23 साल बाद भी वही सवाल—आखिर फैसला कब?

आंदोलन समिति द्वारा सरकार के समक्ष कई सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि 2003 में प्रस्ताव में कोई कमी थी तो उसे स्पष्ट क्यों नहीं किया गया? यदि प्रस्ताव और कैबिनेट की मंजूरी उचित थी तो उसके क्रियान्वयन में इतनी लंबी देरी क्यों हुई? जब प्रदेश में अन्य नए जिले बनाए जा सकते हैं, तो सिहोरा के मामले में निर्णय क्यों लंबित है?

इन सवालों को लेकर अब सिहोरा में एक बार फिर आंदोलन की आवाज तेज होने लगी है।

स्मृति ईरानी की घोषणा भी बनी आंदोलन का मुद्दा

वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव के दौरान सिहोरा पहुंचीं भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी द्वारा सिहोरा जिला बनाने की मांग को लेकर की गई घोषणा को भी आंदोलन समिति लगातार सरकार के समक्ष उठाती रही है।

समिति का कहना है कि घोषणा के बाद भी सिहोरा को जिला बनाने की दिशा में अपेक्षित निर्णय सामने नहीं आया। इसी मुद्दे को लेकर समिति ने आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत करने की बात कही है।

2 अक्टूबर को भाजपा संभागीय कार्यालय के सामने बजेगा घोषणा का ऑडियो

आंदोलन के अगले चरण के तहत 2 अक्टूबर को जबलपुर स्थित भाजपा संभागीय कार्यालय के सामने स्मृति ईरानी की सिहोरा जिला संबंधी घोषणा का ऑडियो बजाया जाएगा।

आंदोलन समिति के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य सरकार और जनप्रतिनिधियों को सिहोरा की वर्षों पुरानी मांग की याद दिलाना है। समिति का कहना है कि सिहोरा जिला गठन की मांग के समर्थन में लंबे समय से दस्तावेज, आंदोलन और सरकार के साथ संवाद मौजूद हैं।

अब आश्वासन नहीं, स्पष्ट निर्णय की मांग

सिहोरा के आंदोलनकारियों का कहना है कि 23 वर्ष का समय किसी छोटी अवधि का नाम नहीं है। इस दौरान एक पूरी पीढ़ी बड़ी हो चुकी है। वर्ष 2003 में जिला बनने की उम्मीद रखने वाले लोग आज भी उसी सवाल के साथ खड़े हैं कि आखिर सिहोरा को जिले का दर्जा कब मिलेगा।

आंदोलन समिति का कहना है कि अब केवल आश्वासन, बैठक या भविष्य की संभावना पर्याप्त नहीं है। सिहोरा के लोग स्पष्ट निर्णय और उसके क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं। 2 अक्टूबर को भाजपा संभागीय कार्यालय के सामने होने वाला कार्यक्रम इसी लंबे इंतजार और मांग को एक बार फिर सामने रखने का माध्यम होगा।

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