खितौला से सिहोरा तक गूंजा ‘हर-हर महादेव’, उमड़ा आस्था का सैलाब,हजारों कांवड़ियों ने पांच किलोमीटर नंगे पैर चलकर किया भोलेनाथ का जलाभिषेक, 15 साल का रिकॉर्ड टूटने का दावा
कलयुग की कलम से राकेश यादव

खितौला से सिहोरा तक गूंजा ‘हर-हर महादेव’, उमड़ा आस्था का सैलाब,हजारों कांवड़ियों ने पांच किलोमीटर नंगे पैर चलकर किया भोलेनाथ का जलाभिषेक, 15 साल का रिकॉर्ड टूटने का दावा
कलयुग की कलम सिहोरा/खितौला – सावन के पावन सोमवार को खितौला से सिहोरा तक निकली भव्य कांवड़ यात्रा ने पूरे क्षेत्र को शिवमय कर दिया। हिरन नदी घाट से पवित्र जल लेकर हजारों श्रद्धालु कांवड़ के साथ करीब पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए सिहोरा स्थित प्रसिद्ध बाबाताल मंदिर पहुंचे। यहां कांवड़ियों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की। यात्रा में उमड़ी भीड़ को आयोजकों ने पिछले करीब 15 वर्षों की सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा बताया।
भगवा रंग में रंगा हिरन नदी घाट
सुबह से ही खितौला स्थित हिरन नदी घाट पर कांवड़ियों का पहुंचना शुरू हो गया था। कुछ ही देर में घाट और आसपास का क्षेत्र भगवा रंग में नजर आने लगा। श्रद्धालुओं ने हिरन नदी से पवित्र जल कांवड़ में भरा और भगवान शिव के जयकारों के साथ सिहोरा की ओर प्रस्थान किया। मार्ग में जगह-जगह लोगों ने कांवड़ियों का स्वागत किया।
शिव की भव्य झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
कांवड़ यात्रा में भगवान भोलेनाथ की भव्य झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। सुसज्जित रथ पर भगवान शिव का मनमोहक स्वरूप श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रहा था। झांकी के साथ सिद्धन धाम के आचार्य भी यात्रा में शामिल रहे। डीजे, भजनों और लगातार गूंजते ‘हर-हर महादेव’ एवं ‘बोल बम’ के जयघोष से पूरा मार्ग भक्तिमय हो गया।
युवाओं और महिलाओं की दिखी बड़ी भागीदारी
इस बार कांवड़ यात्रा में युवाओं के साथ महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। बड़ी संख्या में युवा कांवड़ लेकर पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए, वहीं महिलाओं ने भी धार्मिक उत्साह के साथ कदमताल की। बच्चों और बुजुर्गों की मौजूदगी ने यात्रा के स्वरूप को और व्यापक बना दिया।
नंगे पैर पांच किलोमीटर की आस्था यात्रा
कांवड़ियों ने हिरन नदी से जल लेकर नंगे पैर करीब पांच किलोमीटर की दूरी तय की। रास्तेभर शिव नाम का जाप और जयघोष करते हुए श्रद्धालु सिहोरा पहुंचे। भक्तों के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि संकल्प, श्रद्धा और भगवान शिव के प्रति समर्पण का प्रतीक रही।
बाबाताल मंदिर में हुआ जलाभिषेक
सिहोरा पहुंचने पर कांवड़ यात्रा का श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। इसके बाद कांवड़िए बाबाताल मंदिर पहुंचे और हिरन नदी से लाए पवित्र जल से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों से गूंज उठा।
कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था और उत्साह का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। आयोजन ने क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को नई ऊर्जा देने के साथ सामूहिक श्रद्धा की मजबूत तस्वीर भी प्रस्तुत की।



