उमरिया पान में आस्था और संस्कृति का दिखा अद्भुत संगम, धूमधाम से मना नाग पंचमी पर्व,चौरसिया समाज ने निकाली भव्य शोभायात्रा, चिहूटिया महाराज व मनियादेव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना,सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, बुजुर्गों का सम्मान और मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
कलयुग की कलम से राकेश यादव

उमरिया पान में आस्था और संस्कृति का दिखा अद्भुत संगम, धूमधाम से मना नाग पंचमी पर्व,चौरसिया समाज ने निकाली भव्य शोभायात्रा, चिहूटिया महाराज व मनियादेव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना,सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, बुजुर्गों का सम्मान और मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
कलयुग की कलम उमरिया पान – नाग पंचमी का पावन पर्व सोमवार को उमरिया पान में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। चौरसिया समाज द्वारा नाग पंचमी के साथ चौरसिया दिवस भी सामूहिक रूप से मनाया गया। पर्व को लेकर सुबह से ही नगर में उत्साह का माहौल रहा। पान उत्पादक किसान अपने पान बरेजों में पहुंचे और परंपरानुसार पान बेल का पूजन कर दूध, नारियल सहित विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की।
इसके बाद मंगल भवन में चौरसिया नवयुवक मंडल के संयोजन में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। समाज के बच्चों ने देशभक्ति, धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के दौरान समाज के बुजुर्गों का तिलक-वंदन कर सम्मान किया गया। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत चिहूटिया महाराज के चित्र एवं नाग प्रतिमा के पूजन के साथ हुई। इसके पश्चात मंगल भवन से डीजे और बैंड-बाजों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए ढीमरखेड़ा रोड स्थित नर्मदा नहर के समीप चिहूटिया महाराज के चबूतरे पर पहुंची।
यहां श्रद्धालुओं ने चिहूटिया महाराज एवं मनियादेव की विशेष पूजा-अर्चना की। फूल-माला, बेलपत्र, दूध, खीर और गुड़ सहित अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर विधि-विधान से हवन-पूजन किया गया। पूजा-अर्चना के दौरान मनियादेव और चिहूटिया महाराज के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
पूजन के उपरांत श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। शोभायात्रा और धार्मिक आयोजन में समाज के प्रबुद्धजनों के साथ बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और बच्चे उत्साहपूर्वक शामिल हुए। पूरे आयोजन में आस्था, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर संगम देखने को मिला।



