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पत्रकारिता में तथ्य ही ताकत, एआई के दौर में सत्यापन सबसे जरूरी,श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रशिक्षण शिविर में पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों से लेकर एआई और आरटीआई तक पर हुआ मंथन

कलयुग की कलम से राकेश यादव

पत्रकारिता में तथ्य ही ताकत, एआई के दौर में सत्यापन सबसे जरूरी,श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रशिक्षण शिविर में पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों से लेकर एआई और आरटीआई तक पर हुआ मंथन

कलयुग की कलम कटनी – राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ जिला इकाई कटनी के तत्वावधान में सरदार पटेल यूनिवर्सिटी बालाघाट के सहयोग से 2 अक्टूबर को राज पैलेस, मंडी रोड में एक दिवसीय पत्रकार प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पत्रकारों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण में समाचार लेखन, तथ्य सत्यापन, विश्वसनीय स्रोत, खोजी पत्रकारिता, सूचना का अधिकार अधिनियम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पत्रकारिता में उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। शिविर में शामिल 75 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए।

तथ्यपरक और विश्वसनीय पत्रकारिता पर जोर

कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नेमा, युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज पैलेस की ऑनर सौम्या रांधेलिया, डॉ. ज्योति राजपूत, कटनी डिग्री कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. पारस जैन सहित अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर किया। महात्मा गांधी की जयंती पर उनके सत्य, जनहित और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विचारों को भी स्मरण किया गया।

कार्यक्रम के आयोजक एवं मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ जिला इकाई कटनी के अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र राजपूत (पीएचडी गुरु) ने अतिथियों, प्रशिक्षकों एवं पत्रकारों का स्वागत करते हुए कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है। पत्रकार का दायित्व केवल खबर प्रकाशित करना नहीं, बल्कि समाज तक सही, प्रमाणित और संतुलित जानकारी पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि समाचारों की बढ़ती गति के दौर में तथ्य सत्यापन की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

पहली सूचना को अंतिम सत्य न मानें : सुमन पुरोहित

जबलपुर के वरिष्ठ पत्रकार सुमन पुरोहित ने समाचार लेखन की बारीकियों और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में तथ्यपरकता और विश्वसनीयता सर्वोपरि है। किसी भी सूचना को प्रकाशित करने से पहले उसके स्रोत, दस्तावेज और संबंधित पक्षों की पुष्टि जरूरी है।

उन्होंने कहा कि किसी घटना से जुड़ी पहली सूचना को अंतिम सत्य मान लेना पत्रकारिता की दृष्टि से उचित नहीं है। संबंधित व्यक्ति, अधिकारी अथवा विभाग का पक्ष जानने के साथ उपलब्ध दस्तावेजों की जांच और तथ्यों का मिलान किया जाना चाहिए। उन्होंने भाषा की स्पष्टता, संतुलित प्रस्तुति और विश्वसनीय स्रोतों के महत्व पर भी मार्गदर्शन दिया।

एआई सहायक है, पत्रकार का विकल्प नहीं : लकी पुरोहित

फिल्म मेकर एवं जीवना विजुअल्स के फाउंडर लकी पुरोहित ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर जानकारी देते हुए ChatGPT, Gemini सहित विभिन्न एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग बताए। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग समाचार सामग्री तैयार करने, भाषा सुधारने, जानकारी व्यवस्थित करने और कार्य को आसान बनाने में किया जा सकता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई से मिली जानकारी को बिना सत्यापन प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए। नाम, आंकड़े, तारीख, घटनाक्रम अथवा किसी दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है। तकनीक पत्रकार की मदद कर सकती है, लेकिन पत्रकारिता की विश्वसनीयता तथ्य और सत्यापन से ही कायम रहती है।

आरटीआई जनहित की पड़ताल का प्रभावी माध्यम : सचिन मिश्रा

एडवोकेट, आरटीआई एक्टिविस्ट एवं पर्यावरण मित्र सचिन मिश्रा ने सूचना का अधिकार अधिनियम के महत्व पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनहित से जुड़े मामलों में आधिकारिक दस्तावेज और प्रमाणिक जानकारी हासिल करने के लिए आरटीआई पत्रकारों का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

उन्होंने आरटीआई आवेदन की प्रक्रिया, सूचना प्राप्त करने के अधिकार तथा जनहित के मामलों में इसके जिम्मेदार उपयोग की जानकारी देते हुए कहा कि आरटीआई से प्राप्त दस्तावेज किसी मुद्दे की तथ्यात्मक पड़ताल को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। पत्रकारों को इसका उपयोग व्यक्तिगत विवादों के बजाय व्यापक जनहित के मामलों को सामने लाने के लिए करना चाहिए।

खोजी पत्रकारिता में दस्तावेज और प्रमाण जरूरी : डॉ. मनोज खरे

डॉ. मनोज खरे ने खोजी पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि खोजी पत्रकारिता में विषय का चयन, विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी, दस्तावेजों का अध्ययन, तथ्यों का मिलान और सभी पक्षों से जानकारी लेना जरूरी है। किसी व्यक्ति या संस्था पर लगे आरोपों को केवल दावे के आधार पर प्रकाशित करने के बजाय उसके प्रमाण और दस्तावेजों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि खोजी पत्रकारिता धैर्य और निरंतर प्रयास की मांग करती है तथा पत्रकार को किसी भी विषय की तह तक पहुंचने के लिए उपलब्ध तथ्यों के साथ उनके दस्तावेजी प्रमाणों की भी जांच करनी चाहिए।

जनसरोकार पत्रकारिता की पहचान : आर.बी. गुप्ता

वरिष्ठ पत्रकार आर.बी. गुप्ता ने जनसरोकार और सामाजिक जिम्मेदारी पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाना और आमजन की समस्याओं को उचित मंच देना भी है। उन्होंने स्थानीय समस्याओं, जनहित के विषयों और कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

डॉ. ज्योति राजपूत ने सकारात्मक सोच के साथ जनहित के विषयों को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समाज में जागरूकता पैदा करने और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है।

तकनीक के साथ कदमताल, सिद्धांतों से समझौता नहीं : अज्जू सोनी

मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ जिला इकाई कटनी के जिला महासचिव अज्जू सोनी ने डिजिटल मीडिया और नई तकनीकों से पत्रकारिता में आए बदलावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि तकनीक ने खबरों की पहुंच और गति बढ़ाई है, इसलिए पत्रकारों को नई तकनीकों के साथ अपडेट रहना चाहिए, लेकिन पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों से समझौता नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तकनीक समाचार को गति दे सकती है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता पत्रकार के सत्यापन और जिम्मेदारी से ही तय होती है।

सवाल-जवाब के साथ हुआ व्यावहारिक प्रशिक्षण

कटनी डिग्री कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. पारस जैन ने प्रशिक्षण सत्र के दौरान पत्रकारों से संवाद किया और उन्हें सवाल पूछने एवं अपने अनुभव साझा करने के लिए प्रेरित किया। पत्रकारों ने समाचार लेखन, एआई, आरटीआई, खोजी पत्रकारिता, सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की सत्यता जांचने तथा तथ्य सत्यापन से जुड़े सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे। विशेषज्ञों ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से पत्रकारों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।

शिविर में शिक्षाविद रोशनी जैन, समाजसेवी नितिन पांडे, ढीमरखेड़ा तहसील अध्यक्ष लूनेश्वर पुरी, संतोष तोमर, मोनू खान, कृष्णा पटेल, राकेश निषाद, सुशील मिश्रा, गोविन्द गिरी, सुनील दुबे, सपना बर्मन, हिमांशु बर्मन, मुकेश यादव, पीतम बर्मन, राजेश तिवारी सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं पत्रकार साथी उपस्थित रहे।

75 प्रतिभागियों को दिए प्रमाण-पत्र

प्रशिक्षण शिविर के दौरान मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ की ओर से अतिथियों एवं प्रशिक्षकों का स्वागत और सम्मान किया गया। प्रशिक्षण में शामिल 75 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रमाण-पत्र वितरण के बाद राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ। इसके पश्चात अतिथियों, प्रशिक्षकों और पत्रकार साथियों के लिए स्नेह भोज का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों, पत्रकार साथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। शिविर ने यह संदेश दिया कि बदलते डिजिटल और एआई युग में पत्रकार के लिए नई तकनीक सीखना जितना जरूरी है, उतना ही सत्य, तथ्य, संतुलन और जनहित के पत्रकारिता मूल्यों को बनाए रखना भी आवश्यक है।

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