करवा चौथ पर चांद ने खेला लुकाछिपी का खेल, कहीं मोबाइल पर ऑनलाइन दर्शन तो कहीं थाली में चंद्रमा बनाकर की पूजा! पति की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, सोलह श्रृंगार कर की शिव-पार्वती की पूजा; बादलों ने रोका चांद का दीदार तो महिलाओं ने अपनाए अनोखे तरीके
कलयुग की कलम से राकेश यादव

करवा चौथ पर चांद ने खेला लुकाछिपी का खेल, कहीं मोबाइल पर ऑनलाइन दर्शन तो कहीं थाली में चंद्रमा बनाकर की पूजा! पति की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, सोलह श्रृंगार कर की शिव-पार्वती की पूजा; बादलों ने रोका चांद का दीदार तो महिलाओं ने अपनाए अनोखे तरीके
कलयुग की कलम उमरिया पान – पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और यशस्वी जीवन की कामना के साथ गुरुवार को उमरियापान, ढीमरखेड़ा, खमतरा, मुरवारी, दसरमन, सिलौंडी सहित जिलेभर में करवा चौथ का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखकर सोलह श्रृंगार किया और शाम को विधि-विधान से भगवान शिव, माता पार्वती तथा करवा माता की पूजा-अर्चना कर पति की लंबी उम्र की कामना की।
कहीं मोबाइल पर ऑनलाइन चंद्र दर्शन, तो कहीं थाली में बनाया चंद्रमा का प्रतीक
करवा चौथ पर इस बार मौसम ने भी महिलाओं की परीक्षा ली। आसमान में छाए बादलों के बीच चंद्रमा ने लुकाछिपी का खेल खेला। कहीं चांद के दर्शन आसानी से हो गए, तो कहीं महिलाओं को उसके निकलने का घंटों इंतजार करना पड़ा। जिन स्थानों पर बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं दिया, वहां महिलाओं ने मोबाइल पर चंद्र दर्शन की जानकारी सर्च कर ऑनलाइन पूजन किया। वहीं कुछ महिलाओं ने पूजा की थाली में चंद्रमा का प्रतीक बनाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और परंपरा निभाई।
चलनी की ओट से किया चांद और पति का दीदार
चंद्रमा के दर्शन होते ही महिलाओं ने पूजा की थाली सजाकर चांद को अर्घ्य दिया। इसके बाद चलनी की ओट से पहले चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखकर व्रत का पारण किया। मौसम खराब होने के कारण कई स्थानों पर चंद्र दर्शन में देरी हुई, जिससे महिलाओं में उत्सुकता और बेचैनी बनी रही।
पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य की कामना
करवा चौथ का पर्व सुहाग, प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। महिलाओं ने दिनभर उपवास रखकर अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और सफल जीवन की कामना की। घरों में पूजा की तैयारियां सुबह से ही शुरू हो गई थीं। शाम होते ही महिलाएं सज-धजकर पूजा में शामिल हुईं और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ पर्व मनाया।



