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बाल श्रम पर न्यायालय की सख्त सीख—बच्चों से मजदूरी नहीं, शिक्षा दिलाएं,ढीमरखेड़ा न्यायालय में न्यायाधीश पूर्वी तिवारी ने बाल एवं किशोर श्रम कानून की दी महत्वपूर्ण जानकारी, जागरूकता को बताया सबसे बड़ा हथियार

कलयुग की कलम से राकेश यादव

बाल श्रम पर न्यायालय की सख्त सीख—बच्चों से मजदूरी नहीं, शिक्षा दिलाएं,ढीमरखेड़ा न्यायालय में न्यायाधीश पूर्वी तिवारी ने बाल एवं किशोर श्रम कानून की दी महत्वपूर्ण जानकारी, जागरूकता को बताया सबसे बड़ा हथियार

कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा – बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने और बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के उद्देश्य से मंगलवार को ढीमरखेड़ा न्यायालय परिसर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में न्यायालय में उपस्थित पक्षकारों एवं आमजन को बाल श्रम एवं किशोर श्रम अधिनियम, 1986 से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।

मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के पालन में तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष जीतेन्द्र कुमार शर्मा के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में ढीमरखेड़ा न्यायालय की न्यायाधीश पूर्वी तिवारी ने बाल एवं किशोर श्रम से संबंधित कानूनी पहलुओं को सरल भाषा में समझाया।

उन्होंने कहा कि बच्चों से मजदूरी कराना अथवा उन्हें ऐसे कार्यों में लगाना, जो उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य को प्रभावित करते हैं, गंभीर विषय है। 14 वर्ष से 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों से कार्य कराए जाने की स्थिति में भी कानून में निर्धारित प्रावधानों और प्रतिबंधों का पालन किया जाना आवश्यक है। बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने तथा सुरक्षित एवं स्वस्थ वातावरण में विकास करने का अधिकार है।

गांव-गांव जागरूकता से बदलेगी तस्वीर

कार्यक्रम में बाल श्रम की रोकथाम के लिए सामाजिक, सामुदायिक और प्रशासनिक स्तर पर समन्वित प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में गांव-गांव जागरूकता शिविर आयोजित कर लोगों को बाल श्रम के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने की बात भी कही गई।

न्यायाधीश पूर्वी तिवारी ने उपस्थित लोगों से अपील की कि यदि कहीं बच्चों से नियम विरुद्ध श्रम कराया जा रहा है तो इसकी जानकारी संबंधित विभाग अथवा सक्षम अधिकारी तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि बाल श्रम को रोकना केवल प्रशासन या कानून-व्यवस्था से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

शिक्षा ही बच्चों के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव

कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि बच्चों के हाथों में औजार या मजदूरी का बोझ नहीं, बल्कि किताब और शिक्षा होनी चाहिए। समाज में जागरूकता बढ़ाकर ही बाल श्रम जैसी कुप्रथा पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

इस अवसर पर उपस्थित पक्षकारों एवं आमजन ने बाल श्रम की रोकथाम तथा बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के माध्यम से आमजन को कानून की जानकारी देने के साथ बच्चों के सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए सामाजिक सहभागिता का संदेश दिया गया।

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