प्रशासनमध्यप्रदेश

पठरा की बंजर सरकारी जमीन बनी हरियाली की मिसाल,जहां कभी था अतिक्रमण, आज वहां लहलहा रहे औषधीय और फलदार पेड़,मनरेगा से शुरू हुआ देवारण्य प्रोजेक्ट बना पर्यावरण संरक्षण की प्रेरक कहानी, तीन साल में बदली तस्वीर

कलयुग की कलम से राकेश यादव

पठरा की बंजर सरकारी जमीन बनी हरियाली की मिसाल,जहां कभी था अतिक्रमण, आज वहां लहलहा रहे औषधीय और फलदार पेड़,मनरेगा से शुरू हुआ देवारण्य प्रोजेक्ट बना पर्यावरण संरक्षण की प्रेरक कहानी, तीन साल में बदली तस्वीर

कलयुग की कलम कटनी – विकासखंड बड़वारा की ग्राम पंचायत पठरा में शासकीय भूमि के संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की एक प्रेरणादायी तस्वीर सामने आई है। जिस भूमि पर अतिक्रमण का खतरा बना हुआ था, आज उसी जमीन पर औषधीय एवं फलदार पौधे वृक्षों का आकार लेकर गांव की आबोहवा को हराभरा बना रहे हैं। ग्राम पंचायत के प्रयासों और श्रमिकों की मेहनत से तैयार यह हरित क्षेत्र अब आसपास के गांवों के लिए भी एक मिसाल बनता जा रहा है।

ग्राम पंचायत पठरा के जीआरएस सुशील कुशवाहा के अनुसार, पंचायत ने शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के साथ वहां पौधरोपण का निर्णय लिया। देवारण्य प्रोजेक्ट के तहत मनरेगा योजना से औषधीय और फलदार प्रजातियों के पौधे लगाए गए तथा उनकी उत्तरजीविता सुनिश्चित करने के लिए लगातार देखभाल की गई।

2.15 हेक्टेयर भूमि पर लगाए गए 1370 पौधे

ग्राम पंचायत क्षेत्र के खसरा क्रमांक 184 की 2.15 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर कुल 1370 पौधे रोपे गए। इनमें आंवला, बेल, महुआ, नीम, करंज, कटहल, हर्रा, बहेरा और शीशम जैसी उपयोगी प्रजातियां शामिल हैं। पौधों की नियमित देखरेख और संरक्षण के चलते अधिकांश पौधे अब विकसित होकर वृक्ष का स्वरूप ले चुके हैं।

बताया गया कि जिले में प्रारंभ किए गए देवारण्य प्रोजेक्ट में पौधों की उत्तरजीविता सुनिश्चित करना प्रारंभिक दौर में चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद पंचायत के प्रयासों और श्रमिकों की मेहनत से पौधों को सुरक्षित रखने में उल्लेखनीय सफलता मिली।

पंचायत की इच्छाशक्ति और श्रमिकों की मेहनत ने बदली तस्वीर

व्हीबी-जी राम जी योजना के प्रभारी अधिकारी डा. अजीत सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत पठरा के सक्रिय प्रयासों से पौधों की उत्तरजीविता सुनिश्चित हो सकी। पंचायत की इच्छाशक्ति, दृढ़ संकल्प और श्रमिकों की लगातार मेहनत का परिणाम है कि कुछ ही वर्षों में यह क्षेत्र घने हरित परिसर में बदल गया है।

आज यहां हरियाली के बीच रंग-बिरंगी तितलियां और विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की चहचहाहट वातावरण को जीवंत बनाती है। औषधीय एवं फलदार वृक्षों से युक्त यह क्षेत्र पारंपरिक पौधरोपण से आगे बढ़कर पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

शासकीय भूमि का संरक्षण भी, प्रकृति संवर्धन भी

पठरा की पहल ने यह साबित किया है कि यदि पंचायत स्तर पर इच्छाशक्ति और निरंतर निगरानी हो तो शासकीय भूमि को अतिक्रमण से बचाने के साथ उसे पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है। आज यह हरित क्षेत्र ग्रामीणों को स्वच्छ हवा देने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संपदा तैयार कर रहा है।

अतिक्रमण से बचाई गई शासकीय भूमि पर खड़े हरे-भरे पेड़ अब पठरा की पहचान बनते जा रहे हैं और ग्राम पंचायत के प्रयासों को क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण की एक अनुकरणीय पहल के रूप में देखा जा रहा है।

Related Articles

Back to top button