डीएमएफ कार्यों की राशि जारी होने में अब नहीं होगी देरी: अधूरे दस्तावेजों पर जिला पंचायत सीईओ ने दिखाई सख्ती उपयोगिता एवं कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करने के निर्देश, चेकलिस्ट और निरीक्षण प्रतिवेदन के साथ ही भेजने होंगे प्रस्ताव
कलयुग की कलम से राकेश यादव

डीएमएफ कार्यों की राशि जारी होने में अब नहीं होगी देरी: अधूरे दस्तावेजों पर जिला पंचायत सीईओ ने दिखाई सख्ती उपयोगिता एवं कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करने के निर्देश, चेकलिस्ट और निरीक्षण प्रतिवेदन के साथ ही भेजने होंगे प्रस्ताव
कलयुग की कलम कटनी – जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) मद से स्वीकृत विकास कार्यों की राशि समय पर जारी हो सके, इसके लिए जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं जिला खनिज प्रतिष्ठान की सदस्य सचिव सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर ने सभी क्रियान्वयन एजेंसियों को आवश्यक दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपूर्ण अथवा अलग-अलग प्रारूप में भेजे जा रहे दस्तावेजों के कारण किस्तों के भुगतान में अनावश्यक विलंब हो रहा है, जिसे अब हर हाल में रोका जाएगा।
सीईओ सुश्री कौर ने कहा कि डीएमएफ मद के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की द्वितीय, तृतीय एवं अंतिम किस्त जारी कराने के लिए मांग पत्र के साथ उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) तथा कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (Completion Certificate) निर्धारित प्रारूप में संलग्न करना अनिवार्य होगा।
उन्होंने बताया कि कई मामलों में दस्तावेज अधूरे या अलग-अलग प्रारूप में भेजे जाने के कारण प्रस्तावों का परीक्षण और स्वीकृति प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे विकास कार्यों की राशि जारी होने में अनावश्यक देरी होती है। इस स्थिति से बचने के लिए सभी एजेंसियों को एक समान प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला पंचायत सीईओ ने निर्देशित किया है कि प्रत्येक मांग पत्र के साथ निर्धारित चेकलिस्ट, निरीक्षण प्रतिवेदन तथा अन्य आवश्यक अभिलेख पूर्ण और सुसंगत रूप में संलग्न किए जाएं। इससे प्रस्तावों का त्वरित परीक्षण संभव होगा और स्वीकृत कार्यों की किस्तें समय पर जारी की जा सकेंगी।
उन्होंने सभी संबंधित क्रियान्वयन एजेंसियों से निर्देशों का गंभीरता से पालन करने की अपेक्षा करते हुए कहा कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने से विकास कार्यों के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी, अनावश्यक विलंब समाप्त होगा और स्वीकृत परियोजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।



