सोशल मीडिया की खबर का असर: बहोरीबंद की ऐतिहासिक धूरी बावली का होगा कायाकल्प, 8.95 लाख रुपये से संवरेंगी सदियों पुरानी धरोहर,जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर के निर्देश पर प्रशासन हरकत में, तकनीकी टीम ने किया निरीक्षण; प्राचीन शिल्प और मूर्तियों के संरक्षण पर विशेष जोर
कलयुग की कलम से राकेश यादव

सोशल मीडिया की खबर का असर: बहोरीबंद की ऐतिहासिक धूरी बावली का होगा कायाकल्प, 8.95 लाख रुपये से संवरेंगी सदियों पुरानी धरोहर,जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर के निर्देश पर प्रशासन हरकत में, तकनीकी टीम ने किया निरीक्षण; प्राचीन शिल्प और मूर्तियों के संरक्षण पर विशेष जोर
कलयुग की कलम कटनी – बहोरीबंद विकासखंड की ग्राम पंचायत धूरी स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन बावली के अच्छे दिन लौटने वाले हैं। वर्षों से उपेक्षा और गंदगी का सामना कर रही इस पुरातात्विक धरोहर के जीर्णोद्धार के लिए करीब 8.95 लाख रुपये की लागत से कार्य कराया जाएगा। सोशल मीडिया पर सामने आई खबर का संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और जीर्णोद्धार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
निर्देशों के पालन में जनपद पंचायत बहोरीबंद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार झा तकनीकी अधिकारियों के साथ ग्राम पंचायत धूरी पहुंचे और प्राचीन बावली का स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान तकनीकी अमले को जीर्णोद्धार कार्य के लिए प्राक्कलन तैयार करने तथा आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री झा ने बताया कि बावली के जीर्णोद्धार के लिए 8.95 लाख रुपये का प्राक्कलन तैयार कर लिया गया है। निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत धूरी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया पूरी करते हुए जल्द ही कार्य प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई, क्षतिग्रस्त दीवारों की मरम्मत और समुचित रखरखाव से यह प्राचीन धरोहर फिर से अपनी ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप आकर्षक स्वरूप में दिखाई देगी।
धरोहर संरक्षण में बरती जाएगी विशेष सावधानी
जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जीर्णोद्धार कार्य के दौरान ऐतिहासिक महत्व की मूर्तियों, शिल्पकला और प्राचीन संरचनाओं को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। उन्होंने कहा कि वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरें हमारी अमूल्य विरासत हैं, इसलिए इनके संरक्षण और संवर्धन में पूरी सतर्कता बरती जाए।
उन्होंने श्रमिकों और तकनीकी अमले को भी सावधानीपूर्वक कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि मानसून को ध्यान में रखते हुए सभी तकनीकी मानकों का पालन किया जाए और कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए।
संरक्षण के साथ बढ़ेगा पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व
प्रशासन की पहल से धूरी की यह प्राचीन बावली न केवल फिर से अपनी ऐतिहासिक गरिमा प्राप्त करेगी, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय विरासत को भी नई पहचान मिलेगी। बेहतर रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था के साथ यह धरोहर आने वाले समय में आकर्षण का केंद्र बन सकती है।



