प्रशासनमध्यप्रदेश

करंट बना मौत का कारण: ढीमरखेड़ा के जंगल में मादा तेंदुए की दर्दनाक मौत, पीएम रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा,पहले जताई गई थी आशंका, पोस्टमार्टम ने किया पुष्टि | हाईटेंशन लाइन पर उठे गंभीर सवाल

कलयुग की कलम से राकेश यादव

करंट बना मौत का कारण: ढीमरखेड़ा के जंगल में मादा तेंदुए की दर्दनाक मौत, पीएम रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा,पहले जताई गई थी आशंका, पोस्टमार्टम ने किया पुष्टि | हाईटेंशन लाइन पर उठे गंभीर सवाल

कलयुग की कलम उमरिया पान ढीमरखेड़ा – जंगल में करंट का जाल एक बेजुबान वन्यजीव की जान ले बैठा। वन परिक्षेत्र ढीमरखेड़ा अंतर्गत ग्राम परसेल के गिरुहा नाला के पास संदिग्ध परिस्थितियों में मिले तेंदुए के शव के मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि करीब 4 वर्षीय मादा तेंदुए की मौत करंट लगने से ही हुई थी।

पेड़ के सहारे पहुंचा करंट, शिकार बना तेंदुआ

प्रारंभिक जांच में ही ग्रामीणों ने आशंका जताई थी कि घटना स्थल के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन और पेड़ों के संपर्क के कारण यह हादसा हुआ होगा। मौके पर पेड़ पर आग के निशान भी पाए गए थे।

अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस आशंका पर मुहर लगा दी है। जानकारी के अनुसार तेंदुआ शिकार की तलाश में पेड़ पर चढ़ा था, तभी वह हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गया और करंट की चपेट में आकर उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

डॉग स्क्वॉड की जांच में नहीं मिला शिकार का संकेत

घटना के बाद वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डॉग स्क्वॉड की मदद से जांच कराई। टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए, लेकिन किसी भी प्रकार के शिकार या मानवीय हस्तक्षेप के संकेत नहीं मिले।

जबलपुर में हुआ पोस्टमार्टम

तेंदुए के शव को पोस्टमार्टम के लिए नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय भेजा गया, जहां विशेषज्ञों ने मौत का कारण करंट लगना बताया।

 डुमना नेचर पार्क में अंतिम संस्कार

वन विभाग द्वारा मादा तेंदुए का अंतिम संस्कार डुमना नेचर पार्क में किया गया। इस दौरान वन अमले के अधिकारी मौजूद रहे।

 बिजली लाइन बनी खतरा, जिम्मेदारी तय होगी

वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बिजली लाइनों के आसपास पेड़ों की नियमित कटाई-छंटाई नहीं होने से इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। रेंजरों ने विद्युत विभाग को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।वहीं बिजली विभाग का कहना है कि वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई-छंटाई वन विभाग की अनुमति के बाद ही संभव है।

 वन्यजीवों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

इस घटना ने जंगलों में गुजर रही हाईटेंशन लाइनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी इस तरह की शिकायतें की गई थीं, लेकिन समय रहते सुधार नहीं हुआ।

 प्रशासन के सामने चुनौती

अब देखना होगा कि इस दर्दनाक घटना के बाद जिम्मेदार विभाग कितनी तेजी से कदम उठाते हैं, ताकि भविष्य में किसी और बेजुबान को इस तरह अपनी जान न गंवानी पड़े।

Related Articles

Back to top button