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11 एकड़ शासकीय भूमि पर बड़ा फैसला: अपर कलेक्टर ने निरस्त किया नामांतरण, जमीन दोबारा शासन के खाते में दर्ज करने के निर्देश बम्हौरी की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को लेकर राजस्व रिकॉर्ड में अनियमितता उजागर, जांच के बाद जारी हुआ आदेश

कलयुग की कलम से राकेश यादव

11 एकड़ शासकीय भूमि पर बड़ा फैसला: अपर कलेक्टर ने निरस्त किया नामांतरण, जमीन दोबारा शासन के खाते में दर्ज करने के निर्देश बम्हौरी की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को लेकर राजस्व रिकॉर्ड में अनियमितता उजागर, जांच के बाद जारी हुआ आदेश

कल की कलम ढीमरखेड़ा – ढीमरखेड़ा तहसील के ग्राम बम्हौरी स्थित लगभग 11 एकड़ (4.49 हेक्टेयर) भूमि से जुड़े बहुचर्चित राजस्व प्रकरण में अपर कलेक्टर न्यायालय कटनी ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए संबंधित भूमि का नामांतरण निरस्त कर उसे पुनः शासकीय मद में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय के आदेश के बाद यह मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बम्हौरी स्थित खसरा क्रमांक 143 एवं 164 की भूमि का नाम राजस्व अभिलेखों में एक संस्था के पक्ष में दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों तथा जांच प्रतिवेदनों का परीक्षण किया गया। न्यायालय ने पाया कि भूमि के नामांतरण संबंधी प्रक्रिया में आवश्यक वैधानिक प्रावधानों का पालन नहीं किया गया था।

सुनवाई के दौरान संस्था की ओर से प्रस्तुत पक्ष में वर्ष 2007 में भूमि क्रय किए जाने का दावा किया गया। वहीं प्रकरण में यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित भूमि शासकीय पट्टे एवं अन्य प्रतिबंधित श्रेणी से जुड़ी होने के कारण इसके हस्तांतरण के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक थी। न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर मामले का परीक्षण करते हुए नामांतरण को विधिसम्मत नहीं माना।

प्रकरण में संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज किए गए। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार भूमि स्वामित्व और हस्तांतरण को लेकर विभिन्न दावे सामने आए, जिनका परीक्षण राजस्व अभिलेखों एवं दस्तावेजों के आधार पर किया गया। जांच के दौरान रिकॉर्ड में प्रविष्टियों को लेकर भी सवाल उठे, जिनकी समीक्षा न्यायालय द्वारा की गई।

अपर कलेक्टर न्यायालय ने अपने आदेश में खसरा क्रमांक 143 (रकबा 3.02 हेक्टेयर) एवं खसरा क्रमांक 164 (रकबा 1.47 हेक्टेयर) को संबंधित संस्था के नाम से विलोपित कर पुनः मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज करने तथा राजस्व रिकॉर्ड को नियमानुसार दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।

राजस्व विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय शासकीय भूमि एवं राजस्व अभिलेखों की पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा। वहीं स्थानीय स्तर पर मामले को लेकर विभिन्न चर्चाएं भी जारी हैं। न्यायालय के आदेश के बाद अब आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और रिकॉर्ड संशोधन की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार शासकीय भूमि, पट्टा भूमि एवं प्रतिबंधित श्रेणी की भूमि के हस्तांतरण संबंधी मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति का पालन करना आवश्यक होता है। ऐसे मामलों में राजस्व अभिलेखों की शुद्धता और पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

फिलहाल न्यायालय के आदेश के बाद संबंधित भूमि को पुनः शासकीय अभिलेखों में दर्ज किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ होने की संभावना है। प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई के बाद ही मामले की आगामी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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