बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं! ढीमरखेड़ा छात्रावास में न्यायाधीश ने छात्राओं को बताए अधिकार, पॉक्सो एक्ट की धाराओं से किया जागरूक,अनुसूचित जनजाति छात्रावास में जागरूकता, सुरक्षा एवं संरक्षण शिविर आयोजित, बाल अपराधों से बचाव और शोषण के विरुद्ध कानूनी प्रावधानों की दी विस्तृत जानकारी
कलयुग की कलम से राकेश यादव

बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं! ढीमरखेड़ा छात्रावास में न्यायाधीश ने छात्राओं को बताए अधिकार, पॉक्सो एक्ट की धाराओं से किया जागरूक,अनुसूचित जनजाति छात्रावास में जागरूकता, सुरक्षा एवं संरक्षण शिविर आयोजित, बाल अपराधों से बचाव और शोषण के विरुद्ध कानूनी प्रावधानों की दी विस्तृत जानकारी
कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा – बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मंगलवार को अनुसूचित जनजाति छात्रावास ढीमरखेड़ा में जागरूकता, सुरक्षा एवं संरक्षण शिविर का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के पत्र के पालन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष के निर्देशन में आयोजित शिविर में न्यायाधीश पूर्वी तिवारी ने छात्राओं को बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों और उनके अधिकारों की विस्तार से जानकारी दी।
न्यायाधीश पूर्वी तिवारी ने छात्राओं को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) की धारा 3, 5, 7 एवं 9 के बारे में विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने बताया कि बच्चों को यौन अपराधों और शोषण से सुरक्षा प्रदान करने के लिए कानून में कठोर प्रावधान किए गए हैं। किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार, उत्पीड़न या शोषण की स्थिति में चुप रहने के बजाय विश्वसनीय व्यक्ति और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देना आवश्यक है।
अपने अधिकार जानें, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं
शिविर में छात्राओं को बाल अधिकारों, सुरक्षा, संरक्षण तथा कानून की सहायता प्राप्त करने के तरीकों के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, सम्मान, शिक्षा और भयमुक्त जीवन का अधिकार है। कानूनी जानकारी बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने के साथ विपरीत परिस्थितियों में उचित कदम उठाने का आत्मविश्वास भी प्रदान करती है।
इस अवसर पर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री राजेश प्यासी सहित अधिवक्ता रमेश पटेल, अवधेश असाटी एवं जयप्रकाश नारायण शुक्ला उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को कानून के प्रति जागरूक रहने, अपने अधिकारों को समझने और किसी भी तरह की परेशानी होने पर सहायता लेने का संदेश दिया गया।



