चैंबर की डिजाइन बनी किसानों की मुसीबत! मडे़रा जलाशय का पानी नहरों तक नहीं पहुंचा, धान की फसल पर संकट गहराया,दाएं और बाएं तट की नहरें सूखी, पानी सीधे महनेर हार की ओर बह रहा; किसानों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
कलयुग की कलम से राकेश यादव

चैंबर की डिजाइन बनी किसानों की मुसीबत! मडे़रा जलाशय का पानी नहरों तक नहीं पहुंचा, धान की फसल पर संकट गहराया,दाएं और बाएं तट की नहरें सूखी, पानी सीधे महनेर हार की ओर बह रहा; किसानों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
कलयुग की कलम उमरिया पान – वर्षा की कमी से पहले ही परेशान क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें अब मडे़रा जलाशय की जलापूर्ति व्यवस्था ने और बढ़ा दी हैं। किसानों का आरोप है कि जलाशय से नहरों में पानी पहुंचाने के लिए बनाए गए सप्लाई चैंबर की डिजाइन और निर्माण में गंभीर तकनीकी खामियां हैं, जिसके कारण दाएं और बाएं तट की नहरों में पानी चढ़ ही नहीं पा रहा। पूरा पानी सीधे महनेर हार की ओर बह रहा है, जबकि बम्हनी और मडे़रा क्षेत्र के खेतों तक सिंचाई के लिए एक बूंद पानी भी नहीं पहुंच रहा।

किसानों का कहना है कि यदि चैंबर का निर्माण कुछ अधिक ऊंचाई देकर किया जाता और सामने की ओर लोहे का नियंत्रक गेट (पल्ला) लगाया जाता, तो पानी का प्रवाह नियंत्रित कर दोनों ओर की नहरों में आसानी से छोड़ा जा सकता था। उनका आरोप है कि निर्माण में तकनीकी लापरवाही का खामियाजा अब क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
धान की फसल के लिए इस समय सिंचाई सबसे अधिक आवश्यक है। ऐसे में समय पर पानी नहीं मिलने से फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि बारिश नहीं होने के कारण उनकी उम्मीदें जलाशय और नहर प्रणाली पर टिकी थीं, लेकिन वर्तमान व्यवस्था ने उन्हें बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार लगातार सिंचाई रकबा बढ़ाने और नहरों के माध्यम से किसानों को पानी उपलब्ध कराने के दावे करती है, लेकिन मडे़रा जलाशय की मौजूदा स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती है। उनका कहना है कि यदि समय रहते चैंबर में आवश्यक तकनीकी सुधार नहीं किए गए तो खरीफ सीजन में धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
किसानों ने सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि चैंबर का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए, आवश्यक संशोधन कर नहरों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि बम्हनी, मडे़रा और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को समय पर सिंचाई का पानी मिल सके।



