नकल का विरोध करना शिक्षक को पड़ा भारी: शिकायत करने वाले शिक्षक को ही मिला नोटिस “परीक्षा में नकल का वीडियो वायरल: दोषी शिक्षिका पर कब होगी कार्रवाई कार्रवाई की मांग तेज
कलयुग की कलम से राकेश यादव

नकल का विरोध करना शिक्षक को पड़ा भारी: शिकायत करने वाले शिक्षक को ही मिला नोटिस “परीक्षा में नकल का वीडियो वायरल: दोषी शिक्षिका पर कब होगी कार्रवाई कार्रवाई की मांग तेज,
कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा -जिले के ढीमरखेड़ा विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खम्हरिया बागरी में आयोजित कक्षा 11वीं की वार्षिक परीक्षा के दौरान कथित रूप से नकल करवाने का मामला सामने आया है। इस मामले में एक शिक्षक द्वारा नकल का विरोध करने और शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हीं को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया, जिससे शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब शिक्षक ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खम्हरिया बागरी में 28 फरवरी 2026, शनिवार को कक्षा 11वीं की स्थानीय वार्षिक परीक्षा के अंतर्गत अर्थशास्त्र विषय की परीक्षा आयोजित की गई थी। उसी दौरान विद्यालय में पदस्थ खेल शिक्षक कपिल बागरी की ड्यूटी कक्ष क्रमांक 2 में पर्यवेक्षक के रूप में लगाई गई थी। आरोप है कि परीक्षा के दौरान कक्ष क्रमांक 1 में अर्थशास्त्र विषय की शिक्षिका चंद्रकांता श्रीवास्तव द्वारा विद्यार्थियों को पर्ची के माध्यम से नकल करवाई जा रही थी।
शिक्षक कपिल बागरी के अनुसार परीक्षा के दौरान कुछ विद्यार्थियों तथा कक्ष में ड्यूटी कर रहे अन्य शिक्षकों द्वारा उनसे नाराजगी व्यक्त करते हुए बताया गया कि कक्ष क्रमांक 1 में नकल करवाई जा रही है। इस सूचना के बाद वे स्वयं कक्ष क्रमांक 1 पहुंचे और संबंधित शिक्षिका से नकल नहीं करवाने का आग्रह किया। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार समझाइश दी, लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से नकल करवाने की प्रक्रिया बंद नहीं हुई।
कपिल बागरी ने बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी तत्काल केंद्राध्यक्ष को भी दी, लेकिन उन्हें वहां से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने और मामले को प्रमाण सहित सामने लाने के उद्देश्य से बाहर जाकर एक परिचित से मोबाइल लेकर कथित घटनाक्रम का वीडियो बना लिया। उनका दावा है कि वीडियो में वे शिक्षिका को नकल बंद कराने के लिए मना करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद नकल बताने का क्रम जारी रहा।
इस घटना के बाद शिक्षक कपिल बागरी ने पूरे मामले की शिकायत विकासखंड शिक्षा अधिकारी ढीमरखेड़ा से भी की। शिकायत के आधार पर खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा संकुल प्रभारी प्राचार्य जसवंत पटेल को जांच के लिए भेजा गया। शिक्षक का कहना है कि जांच के दौरान हुई बातचीत की वॉयस रिकॉर्डिंग भी उनके पास सुरक्षित है, जिसमें कथित तौर पर यह कहा गया कि शिक्षिका द्वारा नकल कराना संस्था की सहमति से किया गया था।

शिक्षक का आरोप है कि शिकायत के बाद उनसे शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया। जब उन्होंने शिकायत वापस लेने से इनकार कर दिया तो उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया और बिना किसी गलती के उन्हें ही नोटिस जारी कर दिया गया। उनका कहना है कि उन्होंने केवल परीक्षा की शुचिता बनाए रखने और ईमानदार विद्यार्थियों के हित में आवाज उठाई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।
इधर परीक्षा केंद्राध्यक्ष कार्यालय की ओर से 5 मार्च 2026 को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि कपिल बागरी परीक्षा के दौरान कक्ष क्रमांक 2 से बाहर जाकर मोबाइल से वीडियो बनाते पाए गए, जबकि परीक्षा केंद्र में मोबाइल रखना पूर्णतः प्रतिबंधित है। नोटिस में इसे परीक्षा अधिनियम 1937 की धारा 2 (ग) के तहत कदाचरण और आपराधिक प्रकृति का कृत्य बताते हुए तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है।
इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि परीक्षा के दौरान वास्तव में नकल करवाई गई है तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। वहीं यदि किसी शिक्षक ने गलत कार्य का विरोध किया और उसी को दंडित किया जा रहा है तो यह भी उतना ही गंभीर मामला माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील विषय में किसी भी प्रकार की अनियमितता बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना अत्यंत आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो सके।
शिक्षक कपिल बागरी ने इस पूरे मामले की शिकायत जिला कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी तथा प्रदेश के शिक्षा मंत्री से करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच की जाती है तो सच्चाई सामने आ जाएगी और यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि उन्होंने केवल परीक्षा व्यवस्था की मर्यादा बनाए रखने के लिए ही आवाज उठाई थी।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन, जिला शिक्षा विभाग और शासन स्तर पर इस मामले को कितनी गंभीरता से लिया जाता है। अभिभावकों और आमजन की भी यही अपेक्षा है कि शिक्षा व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने के लिए इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और विद्यार्थियों का विश्वास शिक्षा व्यवस्था पर बना रहे।



