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शासकीय महाविद्यालय ढीमरखेड़ा में एनएसएस स्वयंसेवकों की अनूठी पहल: भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए लगाए सकोरे, रोज पानी भरने का लिया संकल्प

कलयुग की कलम से राकेश यादव

शासकीय महाविद्यालय ढीमरखेड़ा में एनएसएस स्वयंसेवकों की अनूठी पहल: भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए लगाए सकोरे, रोज पानी भरने का लिया संकल्प

कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा – वैशाख माह की तपती दोपहरी में जहां जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है, वहीं ग्रामीण अंचलों में पेयजल संकट गहराने लगा है। इसका प्रभाव केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में शासकीय महाविद्यालय ढीमरखेड़ा के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवकों ने मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए एक सराहनीय पहल की है।

महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. बृजलाल अहिरवार के मार्गदर्शन एवं एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार नागवंशी के नेतृत्व में स्वयंसेवकों ने महाविद्यालय परिसर और समीपस्थ मंदिर परिसर में पक्षियों के लिए सकोरे (मिट्टी के जल पात्र) लगाए। इन सकोरों में नियमित रूप से जल उपलब्ध कराने का संकल्प भी लिया गया, ताकि भीषण गर्मी में प्यास से तड़प रहे पक्षियों को राहत मिल सके।

इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने न केवल सकोरे टांगे, बल्कि आमजन से भी अपील की कि वे अपने घरों, आंगनों और आसपास के स्थानों पर पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करें। स्वयंसेवकों का कहना है कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं और यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम है।

इस अभियान को सफल बनाने में दलनायक अभिषेक कुमार एवं सह-दलनायक दीनदयाल चक्रवर्ती की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा चंद्र कुमार, श्वेता शर्मा, चंद्रमुखी बर्मन, आंचल मेहतर, प्रतिमा मेहतर, अंजलि पटेल एवं छाया उपाध्याय सहित अन्य स्वयंसेवकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के प्राध्यापकगण भी उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. मीनाक्षी शोभरी, डॉ. राजा राम सिंह, डॉ. सचिन कोष्टा, डॉ. श्वेता सिंह बघेल, डॉ. अखिलेश द्विवेदी, डॉ. हर्षित द्विवेदी, डॉ. मनीषा व्यास एवं श्री जवाहरलाल चौधरी प्रमुख रूप से शामिल रहे।

मुख्य बिंदु:

भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए जल संकट कम करने की पहल

महाविद्यालय परिसर व मंदिर में लगाए गए सकोरे

स्वयंसेवकों ने प्रतिदिन पानी भरने का लिया संकल्प

आमजन से भी सहयोग की अपील यह पहल न केवल जीवों के प्रति करुणा का संदेश देती है, बल्कि समाज को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की प्रेरणा भी प्रदान करती है।

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