उमरिया पान कुदवारी में गूंजा आदिवासी एकता का जयघोष, चंद्रकांत ‘चंदू’ चौरसिया के नेतृत्व में धूमधाम से मना विश्व आदिवासी दिवस“बिरसा मुंडा अमर रहें”, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से गूंजा क्षेत्र, समाज की एकता-सम्मान और अधिकारों का दिया संदेश,आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली विरासत को सहेजने का लिया संकल्प; स्वतंत्रता संग्राम के वीर शहीदों को भी किया नमन
कलयुग की कलम से राकेश यादव

उमरिया पान कुदवारी में गूंजा आदिवासी एकता का जयघोष, चंद्रकांत ‘चंदू’ चौरसिया के नेतृत्व में धूमधाम से मना विश्व आदिवासी दिवस“बिरसा मुंडा अमर रहें”, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से गूंजा क्षेत्र, समाज की एकता-सम्मान और अधिकारों का दिया संदेश,आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली विरासत को सहेजने का लिया संकल्प; स्वतंत्रता संग्राम के वीर शहीदों को भी किया नमन
कलयुग की कलम उमरिया पान – विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर उमरिया पान क्षेत्र के ग्राम कुदवारी में आदिवासी समाज की एकता, सम्मान और गौरव को समर्पित कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। समाजसेवी चंद्रकांत ‘चंदू’ चौरसिया के नेतृत्व में हुए कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के भाई-बहन, माताएं, बुजुर्ग और युवा शामिल हुए।
कार्यक्रम में उपस्थित समाजजनों का आत्मीय स्वागत किया गया तथा सभी के लिए स्वल्पाहार एवं जलपान की व्यवस्था की गई। इस दौरान आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक एकजुटता और अधिकारों को लेकर विचार साझा किए गए। समाजसेवी श्री चौरसिया ने कहा कि देश की संस्कृति, इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। समाज के महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
जयघोष से गूंज उठा कुदवारी
कार्यक्रम के समापन अवसर पर “बिरसा मुंडा अमर रहें”, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। देशभक्ति और सामाजिक एकता से ओतप्रोत वातावरण में उपस्थित लोगों ने आदिवासी समाज की एकजुटता को मजबूत करने तथा युवा पीढ़ी को शिक्षा, संस्कार और अपनी गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का संकल्प लिया।
9 अगस्त को क्यों मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस?
विश्व आदिवासी दिवस प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने आदिवासी समुदायों के अधिकारों, उनकी संस्कृति, भाषा, परंपराओं और विशिष्ट पहचान के संरक्षण को लेकर वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से इस दिवस को मान्यता दी। 9 अगस्त 1994 को संयुक्त राष्ट्र के आदिवासी मुद्दों से संबंधित कार्यसमूह की पहली बैठक हुई थी। इसी ऐतिहासिक अवसर की स्मृति में विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है।
यह दिवस दुनिया भर के आदिवासी समुदायों के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा उनके सामने मौजूद चुनौतियों को वैश्विक स्तर पर सामने लाने का अवसर प्रदान करता है। भारत में भी यह दिन आदिवासी समाज की गौरवशाली विरासत और स्वतंत्रता संग्राम में उसके योगदान को याद करने के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों एवं सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश देता है।
भगवान बिरसा मुंडा आदिवासी समाज के संघर्ष, स्वाभिमान और जनजागरण के महान प्रतीक माने जाते हैं। उनका जीवन और संघर्ष आज भी समाज की नई पीढ़ी को अपने अधिकारों और सम्मान के लिए जागरूक रहने की प्रेरणा देता है।
भारत छोड़ो आंदोलन के वीर शहीदों को भी किया नमन
कार्यक्रम में भारत छोड़ो आंदोलन दिवस के अवसर पर देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता असंख्य वीरों के संघर्ष, त्याग और बलिदान का परिणाम है। देश के लिए बलिदान देने वाले महान सपूतों को याद करना और उनकी देशभक्ति से प्रेरणा लेना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
“शिक्षा और एकजुटता से मजबूत होगा समाज” — चंद्रकांत चौरसिया
समाजसेवी चंद्रकांत ‘चंदू’ चौरसिया ने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराएं और विरासत देश की अमूल्य धरोहर हैं। समाज को शिक्षा, जागरूकता और एकजुटता के साथ आगे बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस पर सभी समाजजनों को शुभकामनाएं देते हुए समाजहित में निरंतर कार्य करने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम का समापन देशभक्ति के जयघोष, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे के संदेश के साथ हुआ।



