सड़क पर ‘मौत का जाल’ बन रहे आवारा मवेशी, उमरिया पान सहित मेन रोड के किनारे वाले गांवों में बढ़ा हादसों का खतरा,दिन में किसी तरह निकल जाते वाहन, रात होते ही मेन रोड पर झुंड बनाकर बैठते हैं मवेशी; जिम्मेदारों से स्थायी व्यवस्था की मांग
कलयुग की कलम से राकेश यादव

सड़क पर ‘मौत का जाल’ बन रहे आवारा मवेशी, उमरिया पान सहित मेन रोड के किनारे वाले गांवों में बढ़ा हादसों का खतरा,दिन में किसी तरह निकल जाते वाहन, रात होते ही मेन रोड पर झुंड बनाकर बैठते हैं मवेशी; जिम्मेदारों से स्थायी व्यवस्था की मांग
कलयुग की कलम उमरिया पान – नगर की मुख्य सड़क और प्रमुख मार्गों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा अब राहगीरों और वाहन चालकों के लिए गंभीर परेशानी बनता जा रहा है। दिन के समय तो वाहन चालक किसी तरह मवेशियों को देखकर अपना रास्ता बदल लेते हैं, लेकिन रात के अंधेरे में सड़क पर झुंड बनाकर बैठे या खड़े मवेशी अचानक सामने आ जाने से दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार मुख्य मार्ग पर मवेशियों के कारण कई बार दोपहिया वाहन चालक अपना संतुलन खोकर गिर चुके हैं और चोटिल हुए हैं। विशेष रूप से तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक मवेशियों के आ जाने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने पर वाहन चालकों को सड़क पर बैठे मवेशी दूर से दिखाई भी नहीं देते।
सड़क वाहन चलाने के लिए है, मवेशियों के जमावड़े के लिए नहीं
आवारा पशुओं का सड़क पर लगातार बैठना केवल यातायात व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। मुख्य मार्ग पर मवेशियों के जमावड़े से पैदल चलने वाले लोगों, बाइक सवारों, स्कूली विद्यार्थियों और अन्य वाहन चालकों को परेशानी होती है। प्रशासन और स्थानीय निकाय को इस समस्या को महज अस्थायी रूप से मवेशियों को हटाने तक सीमित न रखते हुए स्थायी समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।
गौशाला या पंचायत स्तर पर बने स्थायी व्यवस्था
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर एवं आसपास के क्षेत्र में विचरण करने वाले आवारा मवेशियों की पहचान कर उनके लिए सुरक्षित स्थान की व्यवस्था की जानी चाहिए। उपलब्धता के अनुसार गौशाला में भेजने के साथ पंचायत अथवा नगरीय निकाय स्तर पर भी अस्थायी पशु आश्रय, पानी और चारे की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
इसके साथ पशु मालिकों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। यदि पालतू मवेशियों को जानबूझकर सड़कों पर खुला छोड़ा जाता है तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई और नियमानुसार जुर्माने की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू की जानी चाहिए।
नियमों में भी पशुओं को सड़क से दूर रखने की जिम्मेदारी
मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों और स्थानीय प्रशासन के पास सार्वजनिक मार्गों पर बाधा पैदा करने वाली स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वैधानिक प्रावधान उपलब्ध हैं। मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 तथा स्थानीय निकायों के उपनियमों के तहत सार्वजनिक मार्गों पर अवरोध और पशुओं के कारण उत्पन्न असुविधा को नियंत्रित करने की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं मोटरयान अधिनियम, 1988 के तहत सड़क सुरक्षा और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी के दायरे में आता है।
हालांकि, नियमों का प्रभाव तभी दिखाई देगा जब जिम्मेदार विभाग नियमित निगरानी करें और पशु मालिकों की जवाबदेही तय करने के साथ पशुओं के लिए मानवीय एवं सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था भी सुनिश्चित करें।
सिर्फ मवेशी हटाने से नहीं निकलेगा समाधान
नागरिकों का कहना है कि समय-समय पर अभियान चलाकर मवेशियों को सड़क से हटाने के बजाय उनकी पहचान, टैगिंग, पशु मालिकों का रिकॉर्ड, सुरक्षित आश्रय और नियमित निगरानी की समन्वित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। रात के समय मुख्य मार्गों पर विशेष निगरानी के साथ पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और दुर्घटना संभावित स्थानों पर चेतावनी संकेतक भी लगाए जाने चाहिए।
नागरिकों की मांग—‘सड़क सुरक्षित हो, व्यवस्था स्थायी हो’
उमरिया पान के लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि मुख्य मार्गों का निरीक्षण कर आवारा मवेशियों के जमावड़े वाले स्थान चिन्हित किए जाएं। पशुओं के लिए गौशाला अथवा पंचायत/नगरीय निकाय स्तर पर वैकल्पिक आश्रय की व्यवस्था हो, पशु मालिकों की जवाबदेही तय की जाए और रात के समय सड़क सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं।
नागरिकों का कहना है कि सड़क पर बैठे मवेशियों की समस्या का समाधान केवल यातायात सुचारु करने के लिए नहीं, बल्कि इंसान और पशु दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। समय रहते ठोस कदम उठाए गए तो रोजाना होने वाली परेशानी और संभावित गंभीर दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।



