मध्यप्रदेशराजनीति

सिहोरा जिला आंदोलन उफान पर — चौथे दिन भी खितौला–सिहोरा पूर्ण बंद, जनआक्रोश चरम पर अस्पताल में भर्ती प्रमोद साहू ने दी अस्पताल छोड़ने की चेतावनी • आंदोलनकारियों का ऐलान—“जिला से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं” • अन्न सत्याग्रह जारी

कलयुग की कलम से राकेश यादव

सिहोरा जिला आंदोलन उफान पर — चौथे दिन भी खितौला–सिहोरा पूर्ण बंद, जनआक्रोश चरम पर

अस्पताल में भर्ती प्रमोद साहू ने दी अस्पताल छोड़ने की चेतावनी • आंदोलनकारियों का ऐलान—“जिला से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं” • अन्न सत्याग्रह जारी

कलयुग की कलम सिहोरा -सिहोरा को जिला बनाए जाने की मांग को लेकर चल रहा जनआंदोलन लगातार चौथे दिन भी पूरे उग्र तेवर में नजर आया। सिहोरा–खितौला क्षेत्र में शुक्रवार को भी बाजार पूरी तरह बंद रहे। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा, वहीं आमजन में शासन-प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश साफ दिखाई दिया। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ बंद का आंदोलन नहीं, बल्कि सिहोरा के अस्तित्व, सम्मान और अधिकार की निर्णायक लड़ाई है।

आंदोलन के बीच जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत आंदोलनकारियों से संवाद करने सिहोरा पहुंचे। हालांकि सिहोरा वासियों ने साफ शब्दों में कहा कि अब किसी भी तरह के आश्वासन या टालमटोल को स्वीकार नहीं किया जाएगा। आंदोलनकारियों ने दो टूक कहा—“जिला से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं।”

सीईओ ने अपनी ओर से यह आश्वासन दिया कि शनिवार को जबलपुर आ रहे उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा से अनशनकारियों की वार्ता कराकर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन बैठक के दौरान जनता का आक्रोश स्पष्ट रूप से झलकता रहा।

धरना स्थल पर रामजी शुक्ला, अमोल चौरसिया, बाल गिरी जी महाराज और नितेश खरया अन्न सत्याग्रह पर डटे हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सिहोरा को जिला घोषित नहीं किया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। बड़ी संख्या में लोग धरना स्थल पर पहुंचकर सत्याग्रहियों का हौसला बढ़ा रहे हैं। पूरा वातावरण “सिहोरा जिला बनाओ” के नारों से गूंज रहा है।

स्वास्थ्य से बड़ा संघर्ष

सबसे गंभीर स्थिति आमरण सत्याग्रह पर बैठे प्रमोद साहू की है, जिन्हें तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बावजूद इसके, प्रमोद साहू ने शुक्रवार को घोषणा की कि वे अस्पताल छोड़ देंगे और किसी भी प्रकार का स्वास्थ्य लाभ नहीं लेंगे। उनका कहना है—“स्वास्थ्य से बड़ा सिहोरा जिला है। जब तक जिला नहीं बनता, यह आंदोलन नहीं रुकेगा।” उनकी इस घोषणा से आंदोलन और अधिक तीखा हो गया है।

जनता का साफ संदेश

सिहोरा में हालात ऐसे हैं कि महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, युवा और व्यापारी सभी एकजुट होकर एक ही स्वर में कह रहे हैं—“अबकी बार, सिहोरा जिला बनाकर ही दम लेंगे।” बढ़ते जनदबाव के बीच प्रशासन की चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं और आंदोलन निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिख रहा है।

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