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स्वामित्व योजना पर पटवारियों का बड़ा ऐलान: 15 सितंबर से निष्पादन एवं पंजीयन कार्य से रहेंगे विरत,पटवारी संघ ने कलेक्टर आशीष तिवारी को सौंपा ज्ञापन, अतिरिक्त दायित्व और व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी का जताया विरोध; दबाव बढ़ा तो प्रदेशभर में कलम-बंद आंदोलन की चेतावनी

कलयुग की कलम से राकेश यादव

स्वामित्व योजना पर पटवारियों का बड़ा ऐलान: 15 सितंबर से निष्पादन एवं पंजीयन कार्य से रहेंगे विरत,पटवारी संघ ने कलेक्टर आशीष तिवारी को सौंपा ज्ञापन, अतिरिक्त दायित्व और व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी का जताया विरोध; दबाव बढ़ा तो प्रदेशभर में कलम-बंद आंदोलन की चेतावनी

कलयुग की कलम कटनी – मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 के कार्यों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संघ ने जिला कलेक्टर आशीष तिवारी को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि पटवारी संवर्ग को स्वामित्व अधिकार अभिलेख के निष्पादन एवं पंजीयन संबंधी कार्य से पूर्णतः पृथक रखा जाए। संघ ने कहा है कि जब तक उनकी पुरानी सेवा संबंधी मांगों का स्थायी निराकरण नहीं होता, तब तक मूल राजस्व दायित्वों के अतिरिक्त नई योजनाओं का अतिरिक्त भार पटवारियों पर नहीं डाला जाए।

संघ ने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि 15 सितंबर 2026 से जिले के समस्त पटवारी स्वामित्व आबादी अधिकार निष्पादन एवं पंजीयन-2026 में निष्पादक के दायित्व से विरत रहेंगे। संघ का कहना है कि यदि उन पर अत्यधिक दबाव बनाया गया तो प्रदेश स्तर पर कलम-बंद आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

आबादी भूमि के रिकॉर्ड में पटवारियों की भूमिका पर उठाए सवाल

पटवारी संघ का तर्क है कि ग्रामीण आबादी क्षेत्र की भूमि का स्वरूप राजस्व कृषि भूमि से अलग है। संघ के अनुसार आबादी क्षेत्र का सर्वे और मैपिंग पंचायत राज विभाग के मार्गदर्शन में तकनीकी एजेंसियों के माध्यम से किया गया है, जिसमें पटवारियों ने सहयोगी की भूमिका निभाई थी। संघ ने कहा कि ऐसे रिकॉर्ड को अंतिम रूप देकर पटवारी को निष्पादक की जिम्मेदारी देना उचित नहीं है। रिकॉर्ड में संभावित तकनीकी एवं लिपिकीय त्रुटियों को सुधारने के लिए पर्याप्त व्यवस्था और अवसर दिया जाना चाहिए।

पंचायतों की भूमिका जारी रखने की मांग

संघ ने ज्ञापन में कहा है कि आबादी क्षेत्र में पट्टा वितरण एवं उसके प्रबंधन से जुड़े कार्य पहले से ही जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर होते रहे हैं। ऐसे में स्वामित्व संबंधी निष्पादन एवं प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से संचालित की जानी चाहिए। पटवारी संघ ने यह भी कहा कि पटवारी अपने स्तर से आवश्यक सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें निष्पादक का व्यक्तिगत दायित्व नहीं दिया जाए।

ई-सिग्नेचर और व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी पर जताई चिंता

पटवारी संघ ने सबसे बड़ी चिंता निष्पादन दस्तावेजों पर पटवारी का नाम, पद, आईडी और ई-सिग्नेचर दर्ज होने को लेकर जताई है। संघ का कहना है कि भविष्य में भूमि की सीमा, क्षेत्रफल, नाम, वारिसान अथवा हिस्सेदारी को लेकर विवाद उत्पन्न होने पर संबंधित पटवारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है और उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।

संघ ने कहा कि पटवारी न तो संबंधित भू-स्वामी हैं और न ही भूमि के हस्तांतरणकर्ता, इसलिए उन्हें ऐसे मामलों में व्यक्तिगत कानूनी दायित्व के दायरे में लाना उचित नहीं होगा।

फार्मर आईडी के दबाव पर भी नाराजगी

ज्ञापन में फार्मर आईडी को लेकर भी संघ ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। संघ के अनुसार पटवारियों ने सीमित समय में बड़ी संख्या में फार्मर आईडी तैयार कर प्रदेश को उपलब्धि दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब शेष कार्य मुख्यतः निरंतर चलने वाली तकनीकी सुधार प्रक्रिया से जुड़ा है। संघ का आरोप है कि इसके बावजूद कार्रवाई की चेतावनी देकर दबाव बनाया जा रहा है। संघ ने इस प्रकार की कार्रवाई रोकने और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

JIO Tag गिरदावरी को बताया अव्यावहारिक

पटवारी संघ ने JIO Tag के साथ गिरदावरी को लेकर भी विरोध जताया है। संघ का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में JIO Tag आधारित गिरदावरी का कार्य व्यवहारिक कठिनाइयों से जुड़ा है। ज्ञापन में संघ ने इस कार्य के दबाव से एक पटवारी द्वारा आत्महत्या किए जाने का उल्लेख करते हुए शोक व्यक्त किया है। संघ ने कहा कि जब तक JIO Tag की अनिवार्यता समाप्त नहीं की जाती, तब तक पटवारी गिरदावरी कार्य नहीं करेंगे। कार्रवाई किए जाने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

वेतन से लेकर पदोन्नति तक कई मांगें लंबित

पटवारी संघ ने अपनी लंबे समय से लंबित सेवा संबंधी मांगों को भी ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया है। इनमें वेतन विसंगति दूर करना, ग्रेड-पे में सुधार, कैडर रिव्यू, पदोन्नति, नियमितीकरण, मोबाइल एवं लैपटॉप उपलब्ध कराना तथा अतिरिक्त कार्य के बदले एक माह के वेतन के बराबर भत्ता दिए जाने जैसी मांगें शामिल हैं।

संघ का कहना है कि अन्य राज्यों की तुलना में पटवारियों पर तकनीकी एवं प्रशासनिक कार्यों का बोझ अधिक है, जबकि उनकी सेवा सुविधाओं और वेतन संबंधी मांगों का अपेक्षित निराकरण नहीं हुआ है।

अतिरिक्त योजनाओं का बोझ नहीं लेने का फैसला

पटवारी संघ ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि पटवारियों से उनके मूल राजस्व दायित्वों के अतिरिक्त योजनाओं का कार्य कराने से पहले उनकी लंबित मांगों का स्थायी समाधान किया जाए। संघ ने दो टूक कहा है कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया और अतिरिक्त दबाव बनाया गया तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।

अब देखना होगा कि पटवारी संघ के इस निर्णय के बाद प्रशासन इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है और स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 की प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है।

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