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कश्मीर के केसर की खुशबू से महकी कटनी की धरती, किसान माखन लाल यादव ने 25-30 बीजों से जगाई बड़ी उम्मीद,ढीमरखेड़ा के किसान का अनूठा प्रयोग बना चर्चा का विषय, पाली मरसिहुड़ी में केसर की खेती कर तलाश रहे कमाई के नए रास्ते

कलयुग की कलम से राकेश यादव

कश्मीर के केसर की खुशबू से महकी कटनी की धरती, किसान माखन लाल यादव ने 25-30 बीजों से जगाई बड़ी उम्मीद,ढीमरखेड़ा के किसान का अनूठा प्रयोग बना चर्चा का विषय, पाली मरसिहुड़ी में केसर की खेती कर तलाश रहे कमाई के नए रास्ते

कलयुग की कलम उमरिया पान – कश्मीर की वादियों में उगने वाला बेशकीमती केसर अब कटनी जिले की धरती पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। ढीमरखेड़ा क्षेत्र के ग्राम पाली मरसिहुड़ी निवासी किसान माखन लाल यादव ने महज 25 से 30 बीजों से केसर की खेती का प्रयोग शुरू कर खेती-किसानी में नवाचार की नई मिसाल पेश की है। उनके खेत में खिले केसर के लाल-सुर्ख फूल अब लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। किसान का यह छोटा-सा प्रयोग जिले में खेती के नए विकल्प तलाश रहे किसानों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

एक छोटी-सी जानकारी ने बदल दी खेती की सोच

किसान माखन लाल यादव को गांव में राजस्थान से गर्म कपड़े बेचने आने वाले कुछ लोगों के साथ बातचीत के दौरान अपने क्षेत्र में केसर की खेती की संभावनाओं के बारे में जानकारी मिली। इस जानकारी ने उनके मन में कुछ नया करने की जिज्ञासा पैदा की। उन्होंने केसर के बीज मंगवाए और अपने खेत के एक छोटे से हिस्से में प्रयोग के तौर पर उनकी बुवाई कर दी।

नियमित देखभाल के बाद पौधों में गांठें बनने लगीं और देखते ही देखते उनमें लाल-सुर्ख फूल खिलने लगे। खेत में केसर के फूल देखकर किसान का उत्साह बढ़ा। इसके बाद उन्होंने अपने इस प्रयोग को आसपास के लोगों के साथ भी साझा किया। सीमित संसाधनों से शुरू हुई यह पहल अब खेती में नवाचार की संभावनाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ रही है।

महंगी फसल ने बढ़ाई उम्मीद, आमदनी का आकलन बाकी

केसर को दुनिया के महंगे मसालों में गिना जाता है। इसकी बाजार में कीमत और मांग के कारण किसान भी इसकी खेती की संभावनाओं को लेकर उत्सुक रहते हैं। माखन लाल यादव ने केसर के फूलों की पंखुड़ियां एकत्रित कर उन्हें सुखाया और स्थानीय स्तर पर इसकी कीमत के संबंध में जानकारी जुटाई। उन्हें इसकी कीमत करीब 400 रुपये प्रति ग्राम तक बताए जाने की जानकारी मिली।

हालांकि, केसर की खेती से वास्तविक लाभ कितना होगा, यह उसकी गुणवत्ता, उत्पादन, बिक्री योग्य मात्रा और बाजार में मिलने वाली कीमत पर निर्भर करेगा। फिलहाल किसान का यह प्रयोग शुरुआती स्तर पर है, लेकिन इससे उन्हें भविष्य में खेती के नए विकल्प तलाशने की उम्मीद जरूर जगी है।

एफपीओ के जरिए बाजार तक पहुंच बनाने की पहल

किसानों को उनकी उपज का बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में मानव जीवन विकास समिति द्वारा संचालित संगमबीडी किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) भी काम कर रहा है। समिति के सचिव एवं पर्यावरणविद् निर्भय सिंह के अनुसार, एफपीओ किसानों को बड़ी कंपनियों और नीमच मंडी जैसे बाजारों तक पहुंच बनाने में सहयोग प्रदान करता है।

इसी क्रम में समिति के कार्यकर्ता सुरेश दुबे ने गांव में किसान माखन लाल यादव से मुलाकात कर केसर उत्पादन के उनके अनुभव की जानकारी ली। इस तरह के प्रयासों से किसानों को नई फसलों के बारे में जानकारी मिलने के साथ अपनी उपज के विपणन की संभावनाएं समझने में भी मदद मिल सकती है।

नवाचार से खेती को नई दिशा देने की कोशिश

माखन लाल यादव का प्रयोग यह संदेश देता है कि खेती में परंपरागत फसलों के साथ नए विकल्पों की संभावनाएं तलाशना भी जरूरी है। हालांकि, केसर की बड़े पैमाने पर खेती शुरू करने से पहले स्थानीय जलवायु, मिट्टी, उपयुक्त तकनीक, उत्पादन लागत और बाजार की उपलब्धता का वैज्ञानिक आकलन आवश्यक होगा।

फिलहाल पाली मरसिहुड़ी के इस किसान ने छोटे स्तर पर प्रयोग कर एक नई संभावना की ओर कदम बढ़ाया है। यदि आगे भी उत्पादन और गुणवत्ता के अनुकूल परिणाम मिलते हैं, तो यह पहल क्षेत्र के किसानों को खेती में नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

प्रकाशन से पहले एक जरूरी बात: खबर में 25-30 बीजों से केसर की खेती का उल्लेख है। यदि किसान ने वास्तव में बीजों के बजाय केसर के कंद (बल्ब) लगाए हैं, तो प्रकाशन से पहले इसकी पुष्टि कर लें। केसर की व्यावसायिक खेती सामान्यतः कंदों से की जाती है। इससे खबर की तथ्यात्मक विश्वसनीयता बनी रहेगी।

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