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मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी अधर में गर्राघाट पुल: हर बारिश में थम जाती है तीन जिलों की रफ्तार,उमरियापान–ढीमरखेड़ा मार्ग पर कम ऊंचाई वाला पुल बना बड़ी परेशानी, ग्रामीणों ने शीघ्र नए उच्च स्तरीय पुल निर्माण की उठाई मांग

कलयुग की कलम से राकेश यादव

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी अधर में गर्राघाट पुल: हर बारिश में थम जाती है तीन जिलों की रफ्तार,उमरियापान–ढीमरखेड़ा मार्ग पर कम ऊंचाई वाला पुल बना बड़ी परेशानी, ग्रामीणों ने शीघ्र नए उच्च स्तरीय पुल निर्माण की उठाई मांग

कलयुग की कलम उमरिया पान – हजारों ग्रामीणों की जीवनरेखा माने जाने वाले उमरियापान–ढीमरखेड़ा मार्ग पर स्थित शुक्ल पिपरिया गर्राघाट पुल बरसात के दिनों में एक बार फिर लोगों की परेशानी का बड़ा कारण बन गया है। पुल की ऊंचाई कम होने के कारण नदी में जलस्तर बढ़ते ही पानी पुल के ऊपर से बहने लगता है। ऐसे में यातायात पूरी तरह प्रभावित हो जाता है और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में यही स्थिति बनती है। पुल पर पानी आने के बाद प्रशासन सुरक्षा की दृष्टि से आवागमन रोक देता है, जिससे हजारों लोगों को कई किलोमीटर लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ता है। इसका सबसे अधिक असर विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों, मरीजों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों पर पड़ता है।

मजबूरी में जान जोखिम में डालकर पुल पार करते हैं राहगीर

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अत्यधिक जरूरी काम, अस्पताल पहुंचने की मजबूरी या दैनिक आवागमन के कारण लोग पुल पर पानी बहने के बावजूद जान जोखिम में डालकर उसे पार करने का प्रयास करते हैं। तेज बहाव के बीच दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक बन जाती है। हर बरसात में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है, लेकिन इसके बावजूद स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।

मुख्यमंत्री ने मंच से की थी घोषणा, लेकिन काम अब तक शुरू नहीं

स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले वर्ष बड़वारा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उमरियापान मंडल अध्यक्ष आशीष चौरसिया ने विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ध्यान गर्राघाट पुल की समस्या की ओर आकर्षित कराया था।

सभा के दौरान विधायक ने मुख्यमंत्री के समक्ष नए पुल की आवश्यकता रखी थी। इस पर मुख्यमंत्री ने मंच से मौजूद जनता से पूछा था, “यह पुल बनना चाहिए या नहीं?” जिस पर उपस्थित लोगों ने एक स्वर में समर्थन जताया था। इसके बाद नए पुल के निर्माण की घोषणा भी की गई थी। हालांकि घोषणा के बाद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।

घोषणा के बाद भी इंतजार, बढ़ रही लोगों की चिंता

बरसात का मौसम शुरू होते ही एक बार फिर वही स्थिति सामने आने लगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि घोषणा के बाद समय रहते निर्माण प्रक्रिया शुरू हो जाती, तो क्षेत्र के लोगों को हर वर्ष होने वाली इस गंभीर समस्या से राहत मिल सकती थी।

ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक गांव का पुल नहीं, बल्कि तीन जिलों और सैकड़ों गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। ऐसे में इसका उच्च स्तरीय निर्माण क्षेत्र के विकास, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन आवागमन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

स्थायी समाधान की मांग

क्षेत्रवासियों ने शासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि मुख्यमंत्री की घोषणा को जल्द अमलीजामा पहनाते हुए गर्राघाट पर उच्च स्तरीय पुल के निर्माण की प्रक्रिया बरसात के बाद शुरू की जाए। उनका कहना है कि हर साल बारिश में संकट झेलने के बजाय अब इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।

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