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कलेक्टर के प्रोत्साहन से बदली खेती की राह, 25 डिसमिल से ढाई एकड़ तक पहुंचा चिया का सफर,ढीमरखेड़ा के किसान जगपति अब पांच एकड़ में चिया विस्तार की तैयारी में, किनोवा और इसबगोल की खेती भी करेंगे

कलयुग की कलम से राकेश यादव

कलेक्टर के प्रोत्साहन से बदली खेती की राह, 25 डिसमिल से ढाई एकड़ तक पहुंचा चिया का सफर,ढीमरखेड़ा के किसान जगपति अब पांच एकड़ में चिया विस्तार की तैयारी में, किनोवा और इसबगोल की खेती भी करेंगे

कलयुग की कलम कटनी – मेहनत, नवाचार और सही मार्गदर्शन मिले तो खेती में भी नई संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं। ढीमरखेड़ा क्षेत्र के दियागढ़ गांव के किसान जगपति ने इसे साबित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। महज 25 डिसमिल जमीन पर चिया और अश्वगंधा की खेती से शुरुआत करने वाले जगपति अब 2.5 एकड़ में चिया उगा रहे हैं और इसे पांच एकड़ तक विस्तार देने की तैयारी में हैं।

पिछले वर्ष कलेक्टर आशीष तिवारी ने जगपति के खेत पहुंचकर उनकी पहल को प्रोत्साहित किया था। इस दौरान किसान ने बताया कि चिया की खेती में करीब 2,200 रुपये खर्च हुए और दो क्विंटल उपज 18 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से संगमबीडी एफपीओ को बेची गई। अश्वगंधा की फसल से 34 किलो बीज और 50 किलो जड़ भी प्राप्त हुई।

अब वैकल्पिक फसलों पर नजर

शुरुआती प्रयोग से उत्साहित जगपति अब खेती का दायरा बढ़ा रहे हैं। चिया का रकबा पांच एकड़ तक पहुंचाने के साथ एक एकड़ में किनोवा और 50 डिसमिल जमीन पर इसबगोल की खेती करने की योजना है। अपनी दो एकड़ जमीन के अलावा वे ठेके पर खेत लेकर भी खेती की नई संभावनाएं तलाश रहे हैं।

तकनीकी सहयोग से मिल रही मजबूती

जगपति को नाबार्ड की आदिवासी विकास परियोजना के माध्यम से बीज एवं तकनीकी सहयोग मिल रहा है। वहीं, मानव जीवन विकास समिति की स्थानीय कार्यकर्ता अदिति वैष्णव का मार्गदर्शन भी उनकी पहल को आगे बढ़ाने में मददगार है। पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैकल्पिक फसलों को अपनाने का उनका प्रयास क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी नई राह दिखा सकता है।

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