वर्षों से जिस घर में बसी खुशियां, अब उसी जमीन पर मिला मालिकाना हक,कटनी में 10 परिवारों को आवासीय भूमि की निःशुल्क रजिस्ट्री, कलेक्टर आशीष तिवारी ने सौंपे स्वामित्व के दस्तावेज
कलयुग की कलम से राकेश यादव

वर्षों से जिस घर में बसी खुशियां, अब उसी जमीन पर मिला मालिकाना हक,कटनी में 10 परिवारों को आवासीय भूमि की निःशुल्क रजिस्ट्री, कलेक्टर आशीष तिवारी ने सौंपे स्वामित्व के दस्तावेज
कलयुग की कलम कटनी – वर्षों की मेहनत से बनाए गए आशियाने को जब कानूनी पहचान मिलती है, तो परिवारों के लिए वह पल खुशियों के साथ सुरक्षा का भरोसा भी लेकर आता है। कटनी जिले में मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के अंतर्गत स्वामित्व योजना के माध्यम से 10 परिवारों को उनकी आवासीय भूमि की निःशुल्क रजिस्ट्री के दस्तावेज प्रदान किए गए। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने हितग्राहियों को ये दस्तावेज सौंपे। इससे परिवारों को अपनी भूमि पर वैधानिक स्वामित्व का प्रमाण मिला और संपत्ति की सुरक्षा को लेकर विश्वास मजबूत हुआ।
किसी को 677 तो किसी को 38 वर्गमीटर भूमि की रजिस्ट्री
योजना के तहत ग्राम कोटरहिया के नरेंद्र राठौर, पिता रामजिवावन राठौर को 245 वर्गमीटर तथा संतोष सिंह, पिता उदयराज सिंह को 38 वर्गमीटर भूमि की रजिस्ट्री प्रदान की गई। ग्राम मुहास की जमुना, पिता मंगल सिंह को 133 वर्गमीटर और ग्राम दड़ौरी के हीरालाल यादव, पिता सुकाली यादव को 241 वर्गमीटर भूमि के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज सौंपे गए।
इसी क्रम में ग्राम पौनिया के पांडू प्रसाद भूमिया, पिता सिमाली भूमिया को 64 वर्गमीटर तथा शंकर पुरी गोस्वामी, पिता जयराम पुरी गोस्वामी को 102 वर्गमीटर भूमि की रजिस्ट्री प्रदान की गई। ग्राम जिवारा के सत्ती कोल, पिता पहलातन कोल को 677 वर्गमीटर और रघुनंदन प्रसाद लोहार, पिता रामचरण विश्वकर्मा को 153 वर्गमीटर भूमि का स्वामित्व प्रमाण मिला।
वहीं, ग्राम देवसरी इंदौर के सौखीलाल, पिता बिसालीराम पटेल को 87 वर्गमीटर तथा हनुमान पटेल, पिता लक्ष्मण प्रसाद पटेल को 326 वर्गमीटर आवासीय भूमि के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज प्रदान किए गए।
संपत्ति की सुरक्षा और विवादों से मिलेगी राहत
स्वामित्व योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में स्थित आवासीय भूमि और मकानों के स्वामित्व का अभिलेख तैयार कर पात्र परिवारों को कानूनी अधिकार का प्रमाण उपलब्ध कराना है। रजिस्ट्री के दस्तावेज मिलने से हितग्राहियों को अपनी संपत्ति पर मालिकाना हक स्थापित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, भूमि संबंधी विवादों और भविष्य में स्वामित्व को लेकर उत्पन्न होने वाली अनिश्चितताओं को कम करने में भी यह पहल उपयोगी साबित हो सकती है।
परिवारों के लिए ये दस्तावेज महज जमीन के कागजात नहीं, बल्कि उनकी वर्षों की मेहनत से बने आशियाने की कानूनी सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को लेकर भरोसे का आधार हैं।



