अमृत सरोवर ने बदली बरमानी की तस्वीर, 20 एकड़ खेतों में पहुंची सिंचाई की उम्मीद,21.73 लाख की लागत से बना जलाशय बना ग्रामीणों की आजीविका का आधार, मछली पालन और सिंघाड़ा उत्पादन को भी मिला सहारा
कलयुग की कलम से राकेश यादव

अमृत सरोवर ने बदली बरमानी की तस्वीर, 20 एकड़ खेतों में पहुंची सिंचाई की उम्मीद,21.73 लाख की लागत से बना जलाशय बना ग्रामीणों की आजीविका का आधार, मछली पालन और सिंघाड़ा उत्पादन को भी मिला सहारा
कलयुग की कलम कटनी – जनपद पंचायत बड़वारा की ग्राम पंचायत बरमानी के अंतर्गत ग्राम जजागढ़ में मनरेगा के माध्यम से निर्मित अमृत सरोवर अब जल संरक्षण के साथ ग्रामीणों की आजीविका का नया आधार बनता दिखाई दे रहा है। 21.73 लाख रुपये की लागत से तैयार इस सरोवर में शुरुआती बारिश में ही करीब 12 हजार घनमीटर पानी का संचयन हुआ है। इससे न केवल भू-जल संरक्षण की संभावनाएं बढ़ी हैं, बल्कि आसपास की करीब 20 एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की राह भी आसान हुई है।
यह अमृत सरोवर व्हीबी-जीरामजी योजना के तहत ग्राम सभा के निर्णय एवं निर्धारित प्रक्रिया के बाद शासकीय भूमि पर विकसित किया गया। निर्माण कार्य से 3,725 मानव दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ, जिससे स्थानीय मनरेगा श्रमिकों को काम मिला।
जल की कमी से जूझते क्षेत्र को मिला स्थायी जलस्रोत
बरमानी क्षेत्र में पहले वर्षा जल के सीमित ठहराव और जल स्रोतों की कमी के कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। पूर्व में जल संरक्षण के कुछ कार्य भी किए गए, लेकिन उनमें लंबे समय तक पानी का ठहराव नहीं हो पाता था। ऐसे में अमृत सरोवर का निर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ है।
अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी श्री अजीत सिंह के अनुसार, ग्राम पंचायत बरमानी का बड़ा हिस्सा वीरान एवं आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। मनरेगा के सीपीआरआई सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्थल चयन के बाद अमृत सरोवर का निर्माण कराया गया। बारिश के पानी के बेहतर संचयन के चलते इसकी उपयोगिता अब सामने आने लगी है।
सिंचाई के साथ मछली पालन और सिंघाड़े से बढ़ी आय की संभावना
सरोवर में पर्याप्त जलभराव होने से आसपास की करीब 20 एकड़ भूमि में सिंचाई की संभावनाएं विकसित हुई हैं। वहीं ग्रामीण इस जलस्रोत का उपयोग मछली पालन और सिंघाड़ा उत्पादन के लिए भी कर रहे हैं। इससे जल संरक्षण के साथ ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आजीविका के अवसर भी उपलब्ध हुए हैं।
अमृत सरोवर में पानी के ठहराव से क्षेत्र में भू-जल स्तर को सहारा मिलने के साथ स्थानीय जैव विविधता को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। ग्रामीणों के लिए यह जलाशय अब केवल पानी संग्रहण का साधन नहीं, बल्कि खेती और आजीविका से जुड़ा उपयोगी संसाधन बन रहा है।
मनरेगा के श्रम से तैयार हुआ विकास का नया मॉडल
ग्राम पंचायत की पहल, अधिकारियों के प्रयास और मनरेगा श्रमिकों की मेहनत से तैयार यह अमृत सरोवर ग्रामीण विकास की उस अवधारणा को मजबूत करता है, जिसमें जल संरक्षण, रोजगार, सिंचाई और आजीविका संवर्धन को एक साथ जोड़ा गया है। बरमानी का यह अमृत सरोवर क्षेत्र में जल संरक्षण आधारित ग्रामीण विकास की एक उपयोगी मिसाल के रूप में सामने आया है।



