पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर 12 सूत्रीय गाइडलाइन,पुलिस की सोशल मीडिया पोस्ट पर अब रहेगी पैनी नजर!,डीजीपी ने जारी की 12 बिंदुओं वाली गाइडलाइन, जांच से जुड़ी जानकारी और संवेदनशील तस्वीरें साझा करने पर रोक
कलयुग की कलम से राकेश यादव

पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर 12 सूत्रीय गाइडलाइन,पुलिस की सोशल मीडिया पोस्ट पर अब रहेगी पैनी नजर!,डीजीपी ने जारी की 12 बिंदुओं वाली गाइडलाइन, जांच से जुड़ी जानकारी और संवेदनशील तस्वीरें साझा करने पर रोक
कलयुग की कलम कटनी – मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर पुलिस मुख्यालय ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। डीजीपी कैलाश मकवाना की ओर से जारी 12 बिंदुओं की गाइडलाइन में फेसबुक, वाट्सऐप, एक्स, इंस्टाग्राम और यू-ट्यूब समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री साझा करने से बचना होगा, जिससे विभाग की गरिमा, गोपनीयता या किसी जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट से शासन के निर्णयों एवं नीतियों की आलोचना नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों या सहकर्मियों के संबंध में सार्वजनिक मंच पर आपत्तिजनक अथवा गरिमा को प्रभावित करने वाली टिप्पणी करने पर भी रोक रहेगी।
लंबित जांच और कोर्ट केस की जानकारी साझा नहीं होगी
गाइडलाइन के अनुसार जांच अथवा न्यायालय में विचाराधीन मामलों से संबंधित ऐसी कोई जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं की जाएगी, जिससे जांच, अभियोजन या न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका हो। पुलिस कार्रवाई के दौरान जब्त सामग्री या हथियारों की बिना सील की गई फोटो और वीडियो को निजी अथवा सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करने की अनुमति नहीं होगी।
सरकारी संसाधनों से निजी सोशल मीडिया संचालन पर रोक
पुलिसकर्मियों को सरकारी सीयूजी सिम, इंटरनेट, वाई-फाई और सरकारी ई-मेल आईडी का उपयोग निजी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने अथवा संचालित करने के लिए नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस विभाग से संबंधित सोशल मीडिया लॉगिन क्रेडेंशियल को निजी मोबाइल फोन पर साझा करने से भी बचने को कहा गया है।
पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाली सामग्री पर सख्ती
साइबर अपराध के मामलों के साथ पीड़ित महिलाओं, बालिकाओं और किशोरों की पहचान उजागर करने वाली फोटो, वीडियो या अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर साझा करने पर विशेष रूप से रोक लगाई गई है। इसका उद्देश्य पीड़ितों की पहचान और संवेदनशील जानकारी को सार्वजनिक होने से बचाना है।
ऑपरेशन और संवेदनशील ड्यूटी की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं
गाइडलाइन में पुलिस के ऑपरेशन, दबिश, संवेदनशील ड्यूटी, वीआईपी सुरक्षा, हथियार प्रशिक्षण और फायरिंग अभ्यास से जुड़ी लाइव स्ट्रीमिंग पर भी रोक लगाई गई है। पुलिस विभाग की उपलब्धियों को किसी एक अधिकारी की निजी उपलब्धि के रूप में प्रचारित करने के बजाय इसे पूरे पुलिस बल की सामूहिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस मुख्यालय की इस गाइडलाइन का उद्देश्य सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच विभागीय गोपनीयता, संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा और पुलिस की आधिकारिक छवि को बनाए रखते हुए सोशल मीडिया उपयोग के लिए स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करना है।



