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वन अधिकार दावों के शत-प्रतिशत निराकरण की तैयारी तेज: ढीमरखेड़ा में हुई विशेष कार्यशाला, एसडीएम-तहसीलदार ने दिए सख्त निर्देश,ग्राम सभाओं को मिलेगी निर्णायक भूमिका, 1 जुलाई से विशेष अभियान के तहत पुराने और नए दावों का होगा परीक्षण

कलयुग की कलम से राकेश यादव

वन अधिकार दावों के शत-प्रतिशत निराकरण की तैयारी तेज: ढीमरखेड़ा में हुई विशेष कार्यशाला, एसडीएम-तहसीलदार ने दिए सख्त निर्देश,ग्राम सभाओं को मिलेगी निर्णायक भूमिका, 1 जुलाई से विशेष अभियान के तहत पुराने और नए दावों का होगा परीक्षण

कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा– जिले में वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन और लंबित दावों के समयबद्ध निराकरण के उद्देश्य से मंगलवार को ढीमरखेड़ा के मंगल भवन में जिला प्रशासन एवं मानव जीवन विकास समिति के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय ब्लॉक स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य वन अधिकार संबंधी दावों के शत-प्रतिशत निराकरण की प्रक्रिया को गति देना और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना रहा।

कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देशानुसार आगामी 1 जुलाई से 31 अक्टूबर तक विशेष अभियान संचालित किया जाएगा, जिसके तहत 31 दिसंबर 2025 तक निरस्त किए गए दावों का पुनः परीक्षण कर उनका निराकरण किया जाएगा तथा नए दावों का भी प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा।

कार्यशाला में पर्यावरणविद् एवं मानव जीवन विकास समिति के सचिव निर्भय सिंह ने सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर) की दावा प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस दौरान ग्राम सभा, वन अधिकार समिति, वन विभाग और राजस्व विभाग की भूमिकाओं एवं दायित्वों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। एटीआरईई (ATREE) संस्था के विशेषज्ञों ने भी विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी साझा की।

कार्यक्रम में जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत आने वाले ग्रामों के वन अधिकार समिति के पदाधिकारी, वन रक्षक, पटवारी, सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

तहसीलदार नितिन पटेल ने वन एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्देश देते हुए कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 पात्र हितग्राहियों का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने दावों के निराकरण में पारदर्शिता, विभागीय समन्वय और ग्राम सभा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

वहीं एसडीएम निधि गोहल ने राजस्व एवं वन विभाग के कर्मचारियों को आवश्यक कार्य दो दिवस के भीतर पूर्ण कर फीडबैक बैठक के माध्यम से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

कार्यशाला में मानव जीवन विकास समिति के मास्टर ट्रेनर चंद्रपाल कुशवाहा ने भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया, साक्षी बुजुर्गों के कथन, नजरी नक्शा, वोटर आईडी, जीपीएस आधारित मानचित्र और सत्यापन रिपोर्ट को ग्राम सभा में शामिल करने की प्रक्रिया की जानकारी दी।

जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर अशोक सिंह धुर्वे ने सामुदायिक दावों एवं सामुदायिक संसाधन अधिकारों के प्रपत्रों को भरने, सीमावर्ती गांवों से संबंधित जानकारी संकलित करने, स्थल निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने और जीपीएस आधारित नक्शांकन की प्रक्रिया पर प्रशिक्षण दिया।

मास्टर ट्रेनर मनीष सिंह ने सामुदायिक वन अधिकार दावों की संपूर्ण प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों, ग्राम सभा की भूमिका तथा सत्यापन प्रणाली को सरल भाषा में समझाया। वहीं मास्टर ट्रेनर मारुति ने डिजिटल मैपिंग का लाइव प्रदर्शन करते हुए ऑनलाइन नक्शांकन, भूमि क्षेत्र निर्धारण और पोर्टल से विवरण डाउनलोड करने की तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों ने लैपटॉप और मोबाइल के माध्यम से डिजिटल अभ्यास भी किया।

कार्यशाला के माध्यम से वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन तथा पात्र हितग्राहियों को उनके अधिकार दिलाने की दिशा में प्रशासन और संबंधित संस्थाओं द्वारा समन्वित प्रयासों को गति देने का संदेश दिया गया।

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