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गेहूं बेचने के बाद भी भुगतान को तरसे किसान: 72 घंटे का वादा हवा, हफ्तों से बैंक और समितियों के चक्कर,उमरियापान-ढीमरखेड़ा क्षेत्र में सैकड़ों किसानों की अटकी राशि, खरीदी पूरी होने के बाद भी खातों में नहीं पहुंचा भुगतान

कलयुग की कलम से राकेश यादव

गेहूं बेचने के बाद भी भुगतान को तरसे किसान: 72 घंटे का वादा हवा, हफ्तों से बैंक और समितियों के चक्कर,उमरियापान-ढीमरखेड़ा क्षेत्र में सैकड़ों किसानों की अटकी राशि, खरीदी पूरी होने के बाद भी खातों में नहीं पहुंचा भुगतान

कलयुग की कलम उमरिया पान – सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के बाद किसानों के खातों में 72 घंटे के भीतर भुगतान पहुंचाने का दावा किया जाता है, लेकिन ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र में यह दावा धरातल पर कमजोर नजर आ रहा है। क्षेत्र के विभिन्न शासकीय उपार्जन केंद्रों पर गेहूं विक्रय करने वाले अनेक किसान आज भी अपनी मेहनत की कमाई के इंतजार में भटक रहे हैं।

जानकारी के अनुसार तहसील क्षेत्र में संचालित एक दर्जन से अधिक उपार्जन केंद्रों पर गेहूं खरीदी का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। कई किसानों के खातों में भुगतान राशि पहुंच चुकी है, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं जिन्हें अभी तक उनकी उपज का भुगतान नहीं मिला है। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

15 दिन नहीं, कई किसानों को एक माह से अधिक का इंतजार

किसानों का कहना है कि गेहूं की तुलाई और खरीदी प्रक्रिया पूरी हुए 15 से 20 दिन ही नहीं, बल्कि कई मामलों में एक माह से अधिक समय बीत चुका है। इसके बावजूद भुगतान उनके खातों तक नहीं पहुंचा है। किसान लगातार समितियों, उपार्जन केंद्रों और बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल जल्द भुगतान होने का आश्वासन दिया जा रहा है।

मानसून से पहले बढ़ी चिंता

किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन की तैयारियों का समय आ चुका है। बीज, खाद और अन्य कृषि कार्यों के लिए उन्हें धनराशि की आवश्यकता है। ऐसे में भुगतान में देरी उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डाल रही है। कई किसान प्रतिदिन बैंक खाते की जांच कर रहे हैं, लेकिन राशि जमा नहीं होने से उनकी चिंता बढ़ती जा रही है।

मानसिक और आर्थिक दबाव झेल रहे किसान

पीड़ित किसानों का आरोप है कि समय पर भुगतान नहीं मिलने से उन्हें अनावश्यक मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई किसानों ने संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रखी, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। किसानों का कहना है कि यदि भुगतान प्रक्रिया में कोई तकनीकी या प्रशासनिक बाधा है तो उसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए।

किसानों की मांग: जल्द मिले मेहनत की कमाई

क्षेत्र के किसानों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि लंबित भुगतान की समीक्षा कर सभी पात्र किसानों के खातों में शीघ्र राशि हस्तांतरित की जाए। किसानों का कहना है कि समय पर भुगतान मिलने से वे आगामी फसल की तैयारियां सुचारू रूप से कर सकेंगे और आर्थिक संकट से राहत मिलेगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार 72 घंटे में भुगतान का दावा करती है, तो फिर सैकड़ों किसान हफ्तों और महीनों तक अपनी उपज की राशि के लिए इंतजार क्यों कर रहे हैं?

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