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कटनी में गेहूं खरीदी का स्वर्णिम अध्याय: रिकॉर्ड उपार्जन से चमकी किसानों की तकदीर,42 फीसदी की ऐतिहासिक बढ़ोतरी, पहली बार 1.98 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदा गया ढीमरखेड़ा बना नंबर-1, किसानों के खातों में पहुंचे 343 करोड़ रुपये से ज्यादा

कलयुग की कलम से राकेश यादव

कटनी में गेहूं खरीदी का स्वर्णिम अध्याय: रिकॉर्ड उपार्जन से चमकी किसानों की तकदीर,42 फीसदी की ऐतिहासिक बढ़ोतरी, पहली बार 1.98 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदा गया ढीमरखेड़ा बना नंबर-1, किसानों के खातों में पहुंचे 343 करोड़ रुपये से ज्यादा

कलयुग की कलम कटनी ढीमरखेड़ा – कृषि प्रधान कटनी जिले ने इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। किसानों की मेहनत, अनुकूल मौसम, बेहतर उत्पादन और प्रशासन की सुव्यवस्थित खरीदी व्यवस्था के चलते जिले में पहली बार 1 लाख 98 हजार 501 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन दर्ज किया गया। यह उपलब्धि जिले के गेहूं उपार्जन इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी खरीदी मानी जा रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार खरीदी में 42.42 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है।

जिला प्रशासन द्वारा खरीदी प्रक्रिया को किसान हितैषी बनाने के लिए किए गए प्रयासों का सकारात्मक परिणाम देखने को मिला। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देशन में खरीदी केंद्रों पर पारदर्शी व्यवस्था, त्वरित तौल, पर्याप्त बारदाना, पेयजल, छाया और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गईं, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

किसानों के खातों में पहुंची 343 करोड़ रुपये से अधिक की राशि

इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए जिले के 52 हजार 991 किसानों ने पंजीयन कराया था, जिनमें से 37 हजार 76 किसानों ने अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेची। किसानों को अब तक 343.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। सरकार द्वारा गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था, जबकि 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस जोड़कर किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया।

सतत निगरानी से बनी सफलता की मिसाल

पूरे खरीदी सत्र के दौरान जिला प्रशासन ने व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए रखी। कलेक्टर ने स्वयं कई खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, गुणवत्ता परीक्षण, बारदाने की उपलब्धता और किसानों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लिया। किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए स्लॉट बुक कराने वाले किसानों के लिए खरीदी अवधि भी बढ़ाई गई, जिससे अधिक से अधिक किसान अपनी उपज बेच सके।

ढीमरखेड़ा ने दिखाई सबसे बड़ी ताकत

समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में ढीमरखेड़ा तहसील पूरे जिले में सबसे आगे रही। यहां 8,218 किसानों से 35,445 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। इसके बाद बहोरीबंद में 32,774 मीट्रिक टन और विजयराघवगढ़ में 31,510 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन दर्ज किया गया।

अन्य तहसीलों में भी खरीदी का आंकड़ा उल्लेखनीय रहा। स्लीमनाबाद में 23,888 मीट्रिक टन, रीठी में 22,780 मीट्रिक टन, कटनी एवं कटनी नगर में 18,718 मीट्रिक टन, बरही में 17,261 मीट्रिक टन तथा बड़वारा में 16,126 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया।

खरीदी केंद्रों पर किसानों को मिली बेहतर सुविधाएं

इस वर्ष उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाओं को और मजबूत किया गया। तौल कांटों की संख्या बढ़ाई गई, तौल पर्ची जारी करने का समय रात तक बढ़ाया गया तथा भुगतान प्रक्रिया को भी अधिक सुविधाजनक बनाया गया। केंद्रों पर पेयजल, छायादार विश्राम स्थल, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, हम्माल-तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर और साफ-सफाई की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे पूरी खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सकी।

मुख्य बिंदु

🔹 पहली बार 1,98,501 मीट्रिक टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी

🔹 पिछले वर्ष से 42.42% अधिक उपार्जन

🔹 37 हजार से अधिक किसानों ने बेची उपज

🔹 343.72 करोड़ रुपये का भुगतान

🔹 ढीमरखेड़ा तहसील रही जिले में अव्वल

🔹 बेहतर प्रबंधन और सुविधाओं से किसानों को मिला लाभ

कटनी की यह उपलब्धि न केवल जिले की कृषि क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि बेहतर प्रबंधन और किसान हितैषी व्यवस्था के बल पर नए कीर्तिमान स्थापित किए जा सकते हैं।

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