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अक्षय तृतीया पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: कटनी-ढीमरखेड़ा में 3 बाल विवाह रुकवाए,प्रशासन की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी रोक

कलयुग की कलम से राकेश यादव

अक्षय तृतीया पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: कटनी-ढीमरखेड़ा में 3 बाल विवाह रुकवाए,प्रशासन की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी रोक

कलयुग की कलम उमरिया पान – अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त पर संभावित बाल विवाहों की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देशन में गठित कोर टीम ने तत्परता दिखाते हुए कटनी शहर में 1 और ढीमरखेड़ा क्षेत्र में 2 सहित कुल 3 बाल विवाह समय रहते रुकवाए।

जिलेभर में सतर्क निगरानी के दौरान मिली गुप्त सूचनाओं पर प्रशासनिक टीम तत्काल मौके पर पहुंची और कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर परिजनों को विवाह टालने के लिए समझाइश दी। साथ ही बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

 मजबूत रणनीति से मिली सफलता

कलेक्टर के निर्देश पर इस वर्ष बाल विवाह रोकने के लिए बहुस्तरीय कार्ययोजना लागू की गई। एसडीएम की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय कोर टीम का गठन कर जिला एवं विकासखंड स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए। सतत निगरानी और समन्वय के चलते समय रहते कार्रवाई संभव हो सकी।

 कटनी शहर में संयुक्त कार्रवाई

महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचना मिली कि आधारकॉप क्षेत्र में एक नाबालिग बालिका का विवाह कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही विभाग और कोतवाली थाना की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची।

जांच में बालिका की उम्र 16 वर्ष और बालक की उम्र 22 वर्ष पाई गई। टीम ने परिजनों व आयोजन से जुड़े लोगों को बाल विवाह कानून की जानकारी दी। समझाइश के बाद परिजन बालिका के बालिग होने के बाद ही विवाह करने पर सहमत हो गए।

कार्रवाई में निधि पटेल, रजनीश सोनी, सुनील सिंह और विवेक मिश्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

 ढीमरखेड़ा में दो बाल विवाह रोके

विकासखंड ढीमरखेड़ा के ग्राम संकुई में दो नाबालिग युवकों के विवाह की तैयारी चल रही थी। जांच में दोनों बालकों की आयु 21 वर्ष से कम पाई गई, जबकि संबंधित बालिकाओं की उम्र 19 और 20 वर्ष थी।

टीम ने स्पष्ट किया कि 21 वर्ष से कम आयु में पुरुष का विवाह कानूनन अपराध है। मौके पर पंचनामा तैयार कर परिजनों को समझाइश दी गई, जिसके बाद उन्होंने बालकों के बालिग होने पर ही विवाह करने की सहमति दी।

प्रशासन की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी रोक लगाई जा रही है। लगातार निगरानी और जनजागरूकता से ऐसे मामलों में कमी लाने के प्रयास जारी हैं।

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