आस्थामध्यप्रदेश

उमरियापान में परशुराम जन्मोत्सव की धूम,धर्म पराक्रम और आस्था का अद्भुत संगम:भव्य शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब, गूंजे भगवान परशुराम के जयकारे

कलयुग की कलम से राकेश यादव

उमरियापान में परशुराम जन्मोत्सव की धूम,धर्म पराक्रम और आस्था का अद्भुत संगम:भव्य शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब, गूंजे भगवान परशुराम के जयकारे

कलयुग की कलम उमरिया पान – उमरियापान में भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर ब्राह्मण समाज द्वारा भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन किया गया। बड़ी माई मंदिर परिसर में शुरू हुआ यह आयोजन आस्था, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का जीवंत उदाहरण बना। क्षेत्रभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत बड़ी माई मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। संतों एवं समाज के वरिष्ठजनों ने भगवान परशुराम के जीवन और आदर्शों का स्मरण करते हुए धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

इसके बाद निकली भव्य शोभायात्रा बड़ी माई मंदिर से प्रारंभ होकर कटराबाजार, झंडा चौक, न्यू बस स्टैंड और आजाद चौक से नगर भ्रमण करते हुए पुनः मंदिर परिसर में संपन्न हुई। पूरे मार्ग में “जय परशुराम” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए, जिससे आयोजन की भव्यता और बढ़ गई।

आकर्षक झांकियों ने मोहा मन

शोभायात्रा में सजी झांकियां विशेष आकर्षण रहीं। राधा-कृष्ण की मनमोहक प्रस्तुति ने भक्तों को भाव-विभोर किया, वहीं भगवान परशुराम की झांकी ने धर्म और पराक्रम का संदेश दिया। संत ब्रह्मानंद जी महाराज की झांकी ने आध्यात्मिकता का भाव जागृत किया।

संतों का संदेश: आदर्शों पर चलने का आह्वान

परम पूज्य जगद्गुरु सुखानंद द्वाराचार्य स्वामी राघव देवाचार्य जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान परशुराम केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और न्याय के प्रतीक हैं। उनके जीवन से हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना का संदेश मिलता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने संस्कारों और संस्कृति से जुड़े रहें।

 सेवा और स्वागत की उत्कृष्ट व्यवस्था

भीषण गर्मी को देखते हुए शोभायात्रा मार्ग में जगह-जगह जलपान, शीतल पेय और ठंडाई की व्यवस्था की गई। विभिन्न स्थानों पर स्वागत मंच बनाकर श्रद्धालुओं का पुष्प वर्षा से अभिनंदन किया गया।

भंडारे में दिखी सामाजिक समरसता

कार्यक्रम के समापन पर बड़ी माई परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। सभी वर्गों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते नजर आए, जो भाईचारे और समानता का संदेश देता है।

 जनसहभागिता ने बनाया आयोजन सफल

आयोजन में विजय दुबे, पद्मेश गौतम, प्रमोद गौतम, मनोज मिश्रा, उमेश पाण्डेय सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की सहभागिता रही। युवाओं ने व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई, वहीं महिलाओं ने पूजा, भजन और झांकियों की सजावट में योगदान दिया। प्रशासन एवं स्वयंसेवकों की सतर्कता से पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित रहा।

भगवान परशुराम जन्मोत्सव का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज को एकजुट करने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुआ। यह आयोजन लंबे समय तक लोगों के स्मृति पटल पर अंकित रहेगा।सुरक्षाव्वस्था को लेकर पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा।

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