अक्षय तृतीया पर सख्ती: बाल विवाह कराने वालों पर 2 साल जेल और ₹1 लाख जुर्माना,बाल विवाह रोकना केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है कलेक्टर श्री तिवारी
कलयुग की कलम से राकेश यादव

अक्षय तृतीया पर सख्ती: बाल विवाह कराने वालों पर 2 साल जेल और ₹1 लाख जुर्माना,बाल विवाह रोकना केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है कलेक्टर श्री तिवारी
कलयुग की कलम कटनी – जिले में अक्षय तृतीया सहित अन्य विवाह मुहूर्तों पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क और सक्रिय हो गया है। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देशन में एक सशक्त, समन्वित और बहुस्तरीय कार्ययोजना लागू की गई है।
हर विकासखंड में विशेष दल गठित
बाल विवाह पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रत्येक विकासखंड स्तर पर संबंधित एसडीएम की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय बाल विवाह रोकथाम दल का गठन किया गया है, जो संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगा।
कलेक्टर की सख्त चेतावनी
कलेक्टर श्री तिवारी ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक कुरीति है और इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निगरानी समितियों और कोर ग्रुप के माध्यम से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आम नागरिकों से भी प्रशासन को सूचना देकर सहयोग करने की अपील की गई है।
कानून का सख्त प्रावधान
बाल विवाह रोकथाम अधिनियम 2006 की धाराओं के तहत—बाल विवाह कराने या सहयोग करने पर 2 वर्ष तक कारावास ₹1 लाख तक जुर्माना या दोनों दंड का प्रावधान है।
सेवा देने वालों पर भी कार्रवाई
महिला एवं बाल विकास विभाग ने हलवाई, कैटरर्स, बैंड-बाजा, घोड़ी संचालक, धर्मगुरु और ट्रांसपोर्टरों से अपील की है कि वे बाल विवाह में किसी भी प्रकार की सेवा न दें। सहयोग करने वालों को भी दोषी मानकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शिकायत के लिए हेल्पलाइन व पोर्टल
बाल विवाह की सूचना देने के लिए नागरिक— 181 | 1098 | 100 बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। बाल विवाह रोकना केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जागरूकता और सहयोग से ही इस कुप्रथा को जड़ से खत्म किया जा सकता है।



