आस्थामध्यप्रदेश

बाबाताल शिव मंदिर में देवी भागवत की अलौकिक छटा माँ भुवनेश्वरी व महालक्ष्मी की महिमा से गूंजा सिहोरा

कलयुग की कलम से राकेश यादव

बाबाताल शिव मंदिर में देवी भागवत की अलौकिक छटा माँ भुवनेश्वरी व महालक्ष्मी की महिमा से गूंजा सिहोरा

कलयुग की कलम सिहोरा -स्थानीय बाबाताल स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में इन दिनों भक्तिरस की अविरल धारा बह रही है। नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा के भव्य आयोजन ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया है। मंगलवार को व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए पंडित इंद्रमणि त्रिपाठी ने माँ भगवती के दिव्य स्वरूपों का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

माँ भुवनेश्वरी और महालक्ष्मी का दिव्य स्वरूप

कथा के दौरान पंडित त्रिपाठी ने माँ भुवनेश्वरी और माता महालक्ष्मी की महिमा का सजीव चित्रण किया। उन्होंने बताया कि माँ भुवनेश्वरी समस्त ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री शक्ति हैं, जिनकी प्रेरणा से सृष्टि का संचालन होता है। वहीं, माता महालक्ष्मी को उन्होंने केवल धन-संपदा की देवी नहीं, बल्कि सद्बुद्धि, शुद्ध आचरण और आत्मिक समृद्धि की प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जो भक्त सच्चे मन से भगवती की शरण में जाता है, उसके जीवन में ऐश्वर्य के साथ शांति और संतुलन स्वतः आ जाते हैं।

भगवती के विविध स्वरूपों की महिमा का वर्णन

देवी भागवत के प्रसंगों के माध्यम से व्यासपीठ से महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती—तीनों स्वरूपों की महत्ता पर प्रकाश डाला गया। पंडित त्रिपाठी ने कहा कि जगत जननी माँ जगदंबा ही समस्त शक्तियों का मूल स्रोत हैं। “जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवती अवतार लेकर भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना करती हैं,” इस संदेश के साथ उन्होंने त्रिगुणात्मक शक्ति के रहस्यों को सरल शब्दों में समझाया। भक्ति को जीवन के कष्टों से मुक्ति का मार्ग बताते हुए उन्होंने श्रोताओं को सत्कर्म और सद्भाव की प्रेरणा दी।

जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर

कथा स्थल जय माता दी के उद्घोष से गूंज उठा। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ रही है, श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। आसपास के गांवों और नगरों से बड़ी संख्या में महिलाएं व पुरुष कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। बीच-बीच में प्रस्तुत भजनों पर भक्त झूमते नजर आए, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।

व्यवस्था व आयोजन की सराहना

आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रतिदिन कथा के समापन पर महाआरती एवं प्रसाद वितरण किया जा रहा है। समिति के सदस्यों ने बताया कि नौ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान का उद्देश्य क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक चेतना का विस्तार करना है।

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