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शिव-पार्वती की भक्ति में रंगा उमरियापान, सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत; घर-घर सजे फुलहरे,पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना से महिलाओं ने किया तीज पूजन, रातभर गूंजे भजन-कीर्तन और शिव-पार्वती के जयकारे

कलयुग की कलम से राकेश यादव

शिव-पार्वती की भक्ति में रंगा उमरियापान, सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत; घर-घर सजे फुलहरे,पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना से महिलाओं ने किया तीज पूजन, रातभर गूंजे भजन-कीर्तन और शिव-पार्वती के जयकारे

कलयुग की कलम उमरिया पान – हरितालिका तीज के पावन अवसर पर उमरियापान सहित गांव से लेकर शहर तक महिलाओं ने श्रद्धा और आस्था के साथ निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सुबह से ही महिलाओं में तीज व्रत को लेकर उत्साह दिखाई दिया। घर-घर फुलहरे सजाए गए और शाम होते ही पूजन की तैयारियां शुरू हो गईं।

सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर दिनभर बिना अन्न-जल ग्रहण किए व्रत रखा। शाम को घरों में आकर्षक मंडप सजाकर फुलहरे के बीच भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमाओं की स्थापना की गई। वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा विधि-विधान से पूजन-अर्चन संपन्न कराया गया। महिलाओं ने तीज व्रत की कथा सुनी और भगवान शिव एवं माता पार्वती से परिवार की सुख-शांति और मंगल की कामना की।

बच्चियों ने भी रखा निर्जला व्रत

हरितालिका तीज के पर्व पर केवल सुहागिन महिलाएं ही नहीं, बल्कि अनेक बच्चियों और युवतियों ने भी श्रद्धापूर्वक निर्जला व्रत रखा। शाम के समय पूजन के दौरान महिलाओं और बच्चियों ने शिव-पार्वती की आराधना करते हुए भजन-कीर्तन किए। कई घरों में देर रात तक धार्मिक गीतों और शिव-पार्वती के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

रातभर हुआ जागरण, भोर में फुलहरे का विसर्जन

पूजन और कथा के बाद महिलाओं ने रातभर जागरण कर भजन-कीर्तन किए। सुबह भोर में महिलाएं पूजा सामग्री एवं फुलहरे लेकर निर्धारित घाटों पर पहुंचीं, जहां विधि-विधान से फुलहरे का विसर्जन किया गया। इसके साथ ही महिलाओं ने व्रत का पारण किया और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।

क्यों रखा जाता है हरितालिका तीज का व्रत?

धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी आस्था से जुड़ा हरितालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि की कामना से रखती हैं। अविवाहित युवतियां भी मनोवांछित एवं योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ शिव-पार्वती का पूजन करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और पारिवारिक मंगल की कामना पूरी होती है।

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