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ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ केमिस्टों का राष्ट्रव्यापी बंद,कटनी में एक दिन बंद रहीं दवा दुकानें, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

कलयुग की कलम से राकेश यादव

ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ केमिस्टों का राष्ट्रव्यापी बंद,कटनी में एक दिन बंद रहीं दवा दुकानें, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

कलयुग की कलम कटनी – ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में बुधवार को जिले भर के केमिस्ट एवं दवा विक्रेताओं ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। इस दौरान अधिकांश दवा दुकानें बंद रहीं। व्यापारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. राज सिंह ठाकुर को सौंपा।

यह हड़ताल All India Organisation of Chemists and Druggists तथा मध्य प्रदेश राज्य केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर आयोजित की गई। जिले के दवा व्यापारियों ने ऑनलाइन दवा बिक्री को मरीजों की सुरक्षा और पारंपरिक दवा व्यवसाय दोनों के लिए गंभीर चुनौती बताया।

मरीजों की सुरक्षा पर जताई चिंता

दवा व्यापारियों का कहना है कि इंटरनेट के माध्यम से दवाओं की बिक्री में कई अनियमितताएं सामने आ रही हैं। फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाओं की आपूर्ति, बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवाओं की होम डिलीवरी और अत्यधिक छूट देकर बिक्री किए जाने से न केवल स्थानीय व्यवसाय प्रभावित हो रहा है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

व्यापारियों के अनुसार, कई बार बिना उचित जांच और डॉक्टर की सलाह के दवाएं उपलब्ध करा दी जाती हैं, जिससे दवाओं के दुरुपयोग और गलत उपचार का खतरा बढ़ जाता है।

शासन से की तीन प्रमुख मांगें

ज्ञापन के माध्यम से दवा विक्रेताओं ने केंद्र सरकार से निम्न प्रमुख मांगें रखीं—अवैध रूप से संचालित ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए।बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के दवाओं की आपूर्ति पर पूर्ण रोक लगाई जाए।ऑनलाइन दवा कारोबार को बढ़ावा देने वाली संबंधित अधिसूचनाओं को वापस लिया जाए।

पारंपरिक व्यवसाय पर बढ़ता दबाव

व्यापारियों ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा भारी छूट देकर दवाएं बेचे जाने से छोटे और मध्यम स्तर के दवा विक्रेताओं पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। यदि इस पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो स्थानीय स्तर पर संचालित हजारों दवा दुकानों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो सकता है।

दवा व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर मरीजों की सुरक्षा और दवा व्यवसाय के हित में आवश्यक कदम उठाएगी।

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