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नौ साल बाद भी अधूरी बरगी व्यपवर्तन परियोजना की ढीमरखेड़ा माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना,शापूरजी पालोनजी कंपनी पर लापरवाही के आरोप, चार प्रमुख पंप बनने के बाद भी खेतों तक नहीं पहुंचा पानी,वर्षों से इंतजार में किसान सरकार की किसान हितैषी मंशा पर असर

कलयुग की कलम से राकेश यादव

नौ साल बाद भी अधूरी बरगी व्यपवर्तन परियोजना की ढीमरखेड़ा माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना,शापूरजी पालोनजी कंपनी पर लापरवाही के आरोप, चार प्रमुख पंप बनने के बाद भी खेतों तक नहीं पहुंचा पानी,वर्षों से इंतजार में किसान सरकार की किसान हितैषी मंशा पर असर

कलयुग की कलम उमरिया पान ढीमरखेड़ा  – किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई बरगी व्यपवर्तन परियोजना की ढीमरखेड़ा माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना (माइक्रो लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट) लगभग नौ वर्ष बाद भी अधूरी पड़ी हुई है। वर्ष 2017 में प्रारंभ की गई इस महत्वाकांक्षी योजना का कार्य निर्धारित समय सीमा में पूर्ण नहीं हो सका, जिसके कारण क्षेत्र के हजारों किसानों को आज तक सिंचाई का लाभ नहीं मिल पाया है।

जानकारी के अनुसार योजना का कार्य वर्ष 2019 तक पूरा कर किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जाना था। कोविड-19 महामारी के दौरान कार्य अवधि में लगभग एक से डेढ़ वर्ष की अतिरिक्त छूट भी दी गई, लेकिन वर्ष 2026 तक भी परियोजना पूर्ण नहीं हो सकी। किसानों का आरोप है कि योजना का कार्य कर रही शापूरजी पालोनजी कंपनी निर्धारित समयसीमा और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य पूरा करने में विफल रही है।

चार प्रमुख पंपों से होनी थी सिंचाई

योजना के तहत जिर्री पंप, सैलारपुर पंप, कोठी पंप और खमतरा पंप के माध्यम से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जाना था। इन पंपों के चालू होने से क्षेत्र की बड़ी कृषि भूमि सिंचित होने की उम्मीद थी, लेकिन आज तक अधिकांश किसानों को एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हुआ है।

कागजों में 80 प्रतिशत, धरातल पर 60-70 प्रतिशत कार्य

स्थानीय सूत्रों के अनुसार परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य अभिलेखों में पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि वास्तविक रूप से धरातल पर केवल 60 से 70 प्रतिशत कार्य ही दिखाई देता है। धरवारा क्षेत्र सहित कई स्थानों पर अब भी पाइपलाइन अधूरी है। कुछ स्थानों पर वाल्व, कंट्रोल यूनिट तथा अन्य आवश्यक उपकरण लगाए ही नहीं गए हैं, जबकि कई जगह लगाए गए उपकरण गायब बताए जा रहे हैं।

जगह-जगह गड्ढे, दुर्घटना की आशंका

ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी द्वारा सड़कों और खेतों के किनारे गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं। इससे आवागमन प्रभावित हो रहा है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। बरसात के मौसम में यह स्थिति और अधिक खतरनाक हो सकती है।

वर्षों से इंतजार में किसान

किसानों का कहना है कि यदि यह योजना समय पर पूरी हो जाती तो सिंचाई सुविधा मिलने से उत्पादन बढ़ता, फसल जोखिम घटता और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती। लेकिन वर्षों से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लाभ नहीं।

कई किसानों ने बताया कि जहां पाइपलाइन बिछाई गई है, वहां भी कनेक्शन से संबंधित आवश्यक पार्ट्स उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में अधूरा कार्य किसानों के लिए चिंता और निराशा का कारण बना हुआ है।

सरकार की किसान हितैषी मंशा पर असर

मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर प्रयासरत है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण योजना का वर्षों तक अधूरा रहना कार्यान्वयन एजेंसियों की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। किसानों का कहना है कि सरकार की मंशा सकारात्मक है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुस्ती और लापरवाही के कारण लाभ समय पर नहीं पहुंच पा रहा।

शापूरजी पालोनजी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग

क्षेत्र के किसानों ने मांग की है कि यदि शापूरजी पालोनजी कंपनी निर्धारित समय में कार्य पूरा करने में विफल रही है, तो कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही अधूरे कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

किसानों की प्रमुख मांगें

योजना का शेष कार्य युद्धस्तर पर पूरा कराया जाए।

सभी पंपों से शीघ्र जलापूर्ति शुरू की जाए।

अधूरी पाइपलाइन और गायब उपकरणों की जांच कर दुरुस्त किया जाए।

लापरवाही बरतने वाली कंपनी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

किसानों को स्पष्ट समयसीमा के साथ कार्य प्रगति की जानकारी दी जाए।

किसानों ने मध्यप्रदेश शासन से अपील की है कि बरगी व्यपवर्तन परियोजना की ढीमरखेड़ा माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूरा कराया जाए, ताकि वर्षों से खेतों में पानी की आस लगाए बैठे किसानों को राहत मिल सके और क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को नई दिशा मिल सके।

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