नंद के आनंद भयो… जय कन्हैया लाल की’ से गूंजा कटनी अंचल,उमरियापान से ढीमरखेड़ा,सिलौंडी, खमतरा तक जन्माष्टमी की धूम, मंदिरों से घरों और शिक्षण संस्थानों तक छाया कान्हा का रंग,व्रत-पूजन के साथ मटकी फोड़ और दंगल ने बढ़ाया उत्साह, आधी रात श्रीकृष्ण जन्म के साथ गूंजे जयकारे
कलयुग की कलम से राकेश यादव

नंद के आनंद भयो… जय कन्हैया लाल की’ से गूंजा कटनी अंचल,उमरियापान से ढीमरखेड़ा,सिलौंडी, खमतरा तक जन्माष्टमी की धूम, मंदिरों से घरों और शिक्षण संस्थानों तक छाया कान्हा का रंग,व्रत-पूजन के साथ मटकी फोड़ और दंगल ने बढ़ाया उत्साह, आधी रात श्रीकृष्ण जन्म के साथ गूंजे जयकारे
कलयुग की कलम उमरिया पान – भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरे जिले में श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों, घरों, स्कूल-कॉलेजों और धार्मिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों का दौर चलता रहा। शाम ढलते ही भजन-कीर्तन और श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। उमरियापान, ढीमरखेड़ा, खमतरा से लेकर सिलौंडी सहित ग्रामीण अंचलों में भी पर्व को लेकर खासा उत्साह नजर आया।
जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की स्मृति में मनाया जाने वाला प्रमुख हिंदू पर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी आस्था के चलते श्रद्धालुओं ने दिनभर व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की और रात्रि में जन्मोत्सव के समय विशेष पूजा-अर्चना की।
मंदिरों में सजे झूले, रात तक चला भक्ति का दौर
जिले के विभिन्न मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को आकर्षक ढंग से सजाया गया। कई स्थानों पर विशेष झांकियां तैयार की गईं। श्रद्धालुओं ने भगवान को झूला झुलाया और भजन-कीर्तन में सहभागिता की। ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ और ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ जैसे जयकारों से मंदिर परिसर गूंजते रहे।
मटकी फोड़ और दंगल बने आकर्षण
जन्माष्टमी के अवसर पर जिले के कई स्थानों पर पारंपरिक मटकी फोड़ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। वहीं कुछ क्षेत्रों में दंगल एवं अन्य पारंपरिक खेलों का आयोजन भी हुआ, जिन्हें देखने बड़ी संख्या में ग्रामीणजन पहुंचे।
शिक्षण संस्थानों में भी जन्माष्टमी को लेकर विद्यार्थियों में उत्साह देखने को मिला। कहीं भगवान श्रीकृष्ण की झांकी सजाई गई तो कहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों ने श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनकी लीलाओं को प्रस्तुत किया।
बच्चों से बुजुर्गों तक दिखी आस्था
जन्माष्टमी के दिन बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी आस्था के अनुसार उपवास रखा। दिनभर व्रत के बाद श्रद्धालुओं ने रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना, आरती और प्रसाद वितरण के बाद उपवास खोला। घरों में भी पूजा के लिए विशेष तैयारियां की गईं।
आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कर्तव्य, धर्म और लोककल्याण के संदेश से भी जुड़ा पर्व है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म एवं कर्तव्य के संदेश को श्रद्धालुओं ने स्मरण किया। जिलेभर में आयोजित कार्यक्रमों ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मजबूत करने का संदेश दिया।
उमरियापान, ढीमरखेड़ा, खमतरा, सिलौंडी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में देर रात तक जन्माष्टमी का उल्लास बना रहा। आधी रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ मंदिरों और आयोजन स्थलों पर शंख-घंटियों की ध्वनि के बीच जयकारे गूंज उठे और श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।



