बड़वारा विधानसभा को 17.30 करोड़ की सड़क सौगात विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री व लोकनिर्माण मंत्री का जताया आभार
कलयुग की कलम से राकेश यादव

बड़वारा विधानसभा को 17.30 करोड़ की सड़क सौगात विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री व लोकनिर्माण मंत्री का जताया आभार
कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा -बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के लिए सड़क अधोसंरचना के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। क्षेत्र के आठ महत्वपूर्ण मार्गों के सुधार एवं सुदृढ़ीकरण के लिए 17 करोड़ 30 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस महत्वपूर्ण निर्णय पर बड़वारा विधायक श्री धीरेंद्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री माननीय श्री मोहन यादव एवं लोकनिर्माण मंत्री माननीय श्री राकेश सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया है।
विधायक श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार निरंतर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इन मार्गों के सुधरने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के अवसरों को भी गति मिलेगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन मार्गों के लिए राशि स्वीकृत की गई है, उनमें—बडेरा पहुंच मार्ग के लिए 1.20 करोड़,भमका–रोझन मार्ग हेतु 1.50 करोड़,झिन्ना पिपरिया–कटरा मार्ग के लिए 2.50 करोड़,कौड़ियां–बंधी–धुरी–पिपरिया मार्ग हेतु 2.80 करोड़,देवरी–केवलारी मार्ग के लिए 1.20 करोड़,सरस्वाही–सुरखी मार्ग हेतु 1.50 करोड़,पडरभटा–संसारपुर मार्ग के लिए 1.20 करोड़ तथा गोपालपुर–सगवा–अतरसूमा–सिलौड़ी मार्ग के लिए 5.40 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
इस प्रकार कुल 17.30 करोड़ रुपये की स्वीकृति से बड़वारा विधानसभा में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
विधायक श्री सिंह ने कहा कि बड़वारा विधानसभा लगातार विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है और सड़क नेटवर्क मजबूत होने से ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री एवं लोकनिर्माण मंत्री को क्षेत्रवासियों की ओर से धन्यवाद दिया।
हालांकि, दूसरी ओर कुछ आदिवासी एवं दूरस्थ गांवों की समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। ग्राम पंचायत भटकमां अंतर्गत आने वाले गडमास मौहारी गांव में लगभग 2 से 2.5 किलोमीटर सड़क की हालत अत्यंत खराब बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे बच्चों को स्कूल जाने के लिए 10 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है और ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों को लिखित आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जैसे अन्य क्षेत्रों में सड़कें स्वीकृत की जा रही हैं, वैसे ही इस आदिवासी गांव की सड़क पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि वर्षों से चला आ रहा इंतजार समाप्त हो सके।



