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दियागढ़ की धरती पर नई इबारत: ढीमरखेड़ा के किसान जगपति सिंह ने चिया खेती से रचा सफलता का इतिहास

कलयुग की कलम से राकेश यादव

दियागढ़ की धरती पर नई इबारत: ढीमरखेड़ा के किसान जगपति सिंह ने चिया खेती से रचा सफलता का इतिहास

कटनी | विशेष रिपोर्ट

कलयुग की कलम ढीमरखेड़ा – परंपरागत खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच विकासखंड ढीमरखेड़ा के ग्राम दियागढ़ के किसान जगपति सिंह ने चिया सीड्स की खेती कर कम लागत में बड़ा मुनाफा कमाकर मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों में की गई यह खेती आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

 मुलाकात से बदली दिशा

दियागढ़ में आयोजित एक बैठक के दौरान जगपति सिंह की पत्नी दुर्गा बाई की मुलाकात मानव जीवन विकास समिति की कार्यकर्ता अदिति वैष्णव से हुई। बातचीत के दौरान चिया की खेती के फायदे सामने आए, जिसने जगपति सिंह को नई राह अपनाने के लिए प्रेरित किया।

 कम लागत, आसान खेती

जगपति सिंह ने 25 डेसिमल जमीन पर केवल 200–250 ग्राम बीज से चिया की बुवाई की। बिना रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों के, केवल 2 बार जुताई और 3–4 सिंचाई में फसल तैयार हो गई। कुल लागत: लगभग ₹1500–₹2000

 मुनाफा सुनकर चौंक जाएंगे

फसल तैयार होने पर 2 क्विंटल 9 किलो चिया का उत्पादन हुआ। बाजार में चिया की कीमत 19 से 20 हजार रुपये प्रति क्विंटल रही।

➡️ कुल आय: ₹38,000–₹40,000

➡️ शुद्ध मुनाफा: ₹36,000 से अधिक

 मिट्टी भी स्वस्थ, किसान भी समृद्ध

मानव जीवन विकास समिति के सचिव एवं पर्यावरणविद निर्भय सिंह के अनुसार, चिया जैसी फसलें जैविक खेती को बढ़ावा देती हैं और जमीन की उर्वरक क्षमता बनाए रखती हैं। इससे किसानों को लंबे समय तक लाभ मिलता है।

 बन रहा प्रेरणा मॉडल

जगपति सिंह की सफलता से प्रभावित होकर अब आसपास के किसान भी चिया की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। फसल चक्र में बदलाव का यह प्रयोग किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में अहम कदम साबित हो रहा है।

कम लागत, कम जोखिम और अधिक मुनाफे का यह मॉडल बताता है कि नई सोच और सही मार्गदर्शन से छोटे किसान भी बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।

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