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जमीनी हकीकत धूप में तड़पती ‘लाडली बहना’: सिलौंडी बस स्टैंड पर न छांव, न शौचालय—महिलाएं सड़क किनारे जाने को मजबूर

कलयुग की कलम से राकेश यादव

जमीनी हकीकत

धूप में तड़पती ‘लाडली बहना’: सिलौंडी बस स्टैंड पर न छांव, न शौचालय—महिलाएं सड़क किनारे जाने को मजबूर

कलयुग की कलम सिलौंडी – सिलौंडी बस स्टैंड पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव ने यात्रियों, खासकर महिलाओं की परेशानी बढ़ा दी है। यहां न तो यात्री प्रतीक्षालय है और न ही प्रसाधन की व्यवस्था, जिसके कारण ‘लाडली बहना’ योजना की हितग्राही महिलाएं चिलचिलाती धूप में बस का इंतजार करने को मजबूर हैं।

 धूप में इंतजार, शादी में जाना बना चुनौती

बस स्टैंड पर बैठी सुलोचना बाई, रानी बाई और कुसुम बाई ने बताया कि उन्हें शादी समारोह में कटनी जाना है, लेकिन बस में देरी के कारण तेज धूप में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। छांव की कोई व्यवस्था नहीं होने से स्थिति और भी कठिन हो जाती है।

 शौचालय नहीं, महिलाओं की गरिमा पर चोट

महिलाओं ने बताया कि बस स्टैंड पर प्रसाधन की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में सड़क किनारे जाना पड़ता है, जिससे उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा दोनों के लिए चिंता का विषय है।

 प्रशासन से लगाई गुहार

महिलाओं का कहना है कि उनकी समस्या को अब तक गंभीरता से नहीं लिया गया है। उन्होंने मांग की है कि सिलौंडी बस स्टैंड पर जल्द से जल्द यात्री प्रतीक्षालय और महिला-पुरुष प्रसाधन की समुचित व्यवस्था कराई जाए।

 जरूरत बुनियादी सुविधाओं की

स्थानीय लोगों का कहना है कि बस स्टैंड पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके और महिलाओं को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

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