प्रशासनमध्यप्रदेश

खेतों में उगा बदलाव! 450 किसानों ने बदली खेती की तस्वीर,हल्दी, अदरक, अश्वगंधा, तुलसी और चिया ने जगाई नई उम्मीद—अब खेत से सीधे बड़े बाजार तक पहुंचाने की तैयारी

कलयुग की कलम से राकेश यादव

खेतों में उगा बदलाव! 450 किसानों ने बदली खेती की तस्वीर,हल्दी, अदरक, अश्वगंधा, तुलसी और चिया ने जगाई नई उम्मीद—अब खेत से सीधे बड़े बाजार तक पहुंचाने की तैयारी

कलयुग की कलम कटनी – कभी जिन खेतों में पारंपरिक फसलों का ही सहारा था, अब वहीं हल्दी की पीली चमक, अदरक की खुशबू, अश्वगंधा की जड़ें, तुलसी की हरियाली और चिया के बीज किसानों के लिए नई संभावनाओं की राह खोल रहे हैं। ढीमरखेड़ा और बड़वारा क्षेत्र के 450 से अधिक आदिवासी किसानों ने करीब 125 एकड़ क्षेत्र में पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए मसाला, औषधीय और प्राकृतिक फसलों की खेती शुरू की है। लगातार तीसरे वर्ष आगे बढ़ रही यह पहल अब केवल फसल परिवर्तन नहीं, बल्कि किसानों की सोच और खेती के तरीके में बदलाव की मिसाल बन रही है।

एक खेत की सफलता बनी दूसरे किसानों की प्रेरणा

प्राकृतिक, औषधीय और बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिए कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा कृषि एवं उद्यानिकी विभाग को दिए गए निर्देशों के बाद किसानों को नई फसलों से जोड़ने के प्रयास तेज हुए। शुरुआती दौर में किसानों के सामने नई फसल, तकनीक और बाजार को लेकर कई सवाल थे। पर्यावरणविद् एवं मानव जीवन विकास समिति के सचिव निर्भय सिंह के प्रयासों से किसानों को नई खेती के प्रति प्रोत्साहित किया गया।

पिछले वर्ष किसानों को अश्वगंधा के निःशुल्क बीज उपलब्ध कराए गए थे। करीब 25 एकड़ में अश्वगंधा की खेती हुई। तैयार उपज नीमच कृषि उपज मंडी में करीब 25 हजार रुपये में विक्रय हुई और इसका लाभ उत्पादक किसानों को मिला। एक सफल प्रयोग ने दूसरे किसानों का भरोसा बढ़ाया और इस वर्ष नई फसलों का दायरा और किसानों की संख्या दोनों बढ़ गई।

175 किसान हल्दी, 100-100 अश्वगंधा व तुलसी, 75 किसान अदरक की खेती में

इस वर्ष करीब 175 किसान हल्दी, 100-100 किसान अश्वगंधा एवं तुलसी तथा 75 आदिवासी किसान अदरक की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा 15 किसानों ने करीब आधा एकड़ में चिया की खेती शुरू की है। अनुमान है कि इन खेतों से करीब 700 से 800 क्विंटल अदरक, 2500 से 3000 क्विंटल हल्दी और लगभग 750 किलोग्राम तुलसी की उपज प्राप्त हो सकती है। अश्वगंधा की भी अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है।

अब खेत की उपज को मिलेगा बड़ा बाजार

नई फसलों के साथ किसानों के सामने उपज के उचित बाजार और बेहतर मूल्य की चुनौती भी है। इसी दिशा में एफपीओ संगमबीडी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी किसानों की उपज को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास कर रही है। एफपीओ द्वारा नीमच कृषि उपज मंडी, डाबर इंडिया लिमिटेड और महाराष्ट्र की सुहाना मसाला सहित अन्य कंपनियों एवं औद्योगिक संस्थानों से संपर्क किया जा रहा है। कंपनियों की ओर से जिले में उत्पादित मसाला एवं औषधीय फसलों की खरीद में रुचि दिखाई गई है, जिससे किसानों में उत्साह बढ़ा है।

ढीमरखेड़ा से बड़वारा तक पहुंची नई खेती की मुहिम

नाबार्ड के टीडीएफ फंड के अंतर्गत नानबाड़ी परियोजना के तहत ढीमरखेड़ा विकासखंड के कोठी, हर्रई, सगौना, सिवनी, दैगवां, दियागढ़, उमरपानी, छाहर, भलवारा, मेर, पहरुआ, कटारिया, खदंवारा, बांध, भमका, महगवां, सर्रा, तिलमन और बिजौरी सहित अनेक गांवों के किसान मसाला एवं औषधीय फसलों की खेती से जुड़े हैं।

वहीं बड़वारा क्षेत्र के भदौरा, पथवारी, विलायतकलां, पठरा, भादावर, जमुनियां, बिजौरी, भमराड, चादन और चपहनी गांवों में भी किसान अश्वगंधा, हल्दी, अदरक और तुलसी की खेती कर रहे हैं। राज्य शासन के कृषि विभाग की आत्मा परियोजना, नाबार्ड के नानबाड़ी कार्यक्रम और मानव जीवन विकास समिति के माध्यम से किसानों को निःशुल्क बीज उपलब्ध कराकर इस पहल से जोड़ा गया है।

खेती के साथ बदली सोच, अब बाजार पर नजर

निर्भय सिंह के अनुसार, शुरुआत में किसानों के मन में नई फसलों को लेकर हिचक थी, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। एक किसान की सफलता दूसरे किसान के लिए प्रेरणा बन रही है। जिस प्रयोग को एक खेत में आजमाया गया, उसे देखकर दूसरे किसान भी आगे आ रहे हैं।

ढीमरखेड़ा और बड़वारा के खेतों में लहलहा रही हल्दी, अदरक, अश्वगंधा, तुलसी और चिया अब सिर्फ फसलें नहीं, बल्कि किसानों की बदलती सोच और खेती में नए प्रयोग की पहचान बन रही हैं। आने वाले समय में बेहतर बाजार और उचित मूल्य की व्यवस्था मजबूत होती है तो यह पहल क्षेत्र के किसानों की आय और कृषि पद्धति में महत्वपूर्ण बदलाव का आधार बन सकती है।

Related Articles

Back to top button