प्रशासनमध्यप्रदेश

राशन की हेराफेरी पर कलेक्टर का सख्त एक्शन, तीन पर FIR,उचित मूल्य दुकान में 6.18 लाख के खाद्यान्न का हिसाब नहीं मिला, गेहूं-चावल सहित नमक के स्टॉक में बड़ी गड़बड़ी

कलयुग की कलम से राकेश यादव

राशन की हेराफेरी पर कलेक्टर का सख्त एक्शन, तीन पर FIR,उचित मूल्य दुकान में 6.18 लाख के खाद्यान्न का हिसाब नहीं मिला, गेहूं-चावल सहित नमक के स्टॉक में बड़ी गड़बड़ी

कलयुग की कलम कटनी – सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न की हेराफेरी और कालाबाजारी पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी द्वारा समय-सीमा बैठक में राशन की गड़बड़ी करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए जाने के बाद ढीमरखेड़ा क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। शासकीय उचित मूल्य दुकान देवरी-बिछिया में जांच के दौरान करीब 6 लाख 18 हजार 586 रुपये मूल्य के खाद्यान्न की हेराफेरी पाए जाने पर तीन लोगों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

तीन लोगों पर मामला दर्ज

कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी वंदना जैन के आवेदन पर ढीमरखेड़ा पुलिस ने शासकीय उचित मूल्य दुकान देवरी-बिछिया की पूर्व विक्रेता एवं अध्यक्ष अनामिका आजीविका महिला स्व-सहायता समूह की जयंती बाई बर्मन, निवासी देवरी-बिछिया, धर्मेंद्र पटेल, निवासी पौड़ी कला तथा वर्तमान विक्रेता अभिलाष रंजन बर्मन, निवासी देवरी-बिछिया के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया है।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(5) तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 एवं 7 के तहत कार्रवाई की है।

एक दुकान, दो वितरण केंद्र मिलने से उठे सवाल

जांच के दौरान ग्राम पंचायत दिवरी-बिछिया के अंतर्गत देवरी, बिछिया और पिपरिया गांव सामने आए। जांच में यह तथ्य सामने आया कि पिपरिया गांव की देवरी स्थित उचित मूल्य दुकान से दूरी करीब 8 किलोमीटर होने के कारण वहां नवीन भवन से खाद्यान्न का वितरण किया जा रहा था। वहीं देवरी गांव से भी खाद्यान्न वितरण किया जाना पाया गया।

इस तरह एक ही शासकीय उचित मूल्य दुकान के दो अलग-अलग वितरण केंद्र संचालित होते मिले। इन केंद्रों के संबंध में विक्रेता द्वारा जांच टीम के समक्ष आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

ऑनलाइन रिकॉर्ड और मौके के स्टॉक में भारी अंतर

निरीक्षण के दौरान एईपीडीएस पोर्टल पर दर्ज खाद्यान्न और मौके पर भौतिक सत्यापन में उपलब्ध स्टॉक का मिलान किया गया। इस दौरान दोनों में बड़ा अंतर पाया गया।

जांच रिपोर्ट के अनुसार दुकान में 9,998.08 किलोग्राम गेहूं, 12,075.87 किलोग्राम चावल, 631 किलोग्राम नमक और 1 किलोग्राम शक्कर के स्टॉक में अंतर पाया गया। जांच में इसे खाद्यान्न के अपयोजन से जोड़ा गया है।

6.18 लाख रुपये की राशि वसूली योग्य

जांच रिपोर्ट में अपयोजित खाद्यान्न की बाजार दर के आधार पर गेहूं की कीमत 2 लाख 49 हजार 952 रुपये, चावल की कीमत 3 लाख 62 हजार 276 रुपये और नमक की कीमत 6 हजार 310 रुपये आंकी गई। इस प्रकार कुल 6 लाख 18 हजार 586 रुपये की राशि वसूली योग्य पाई गई।

कलेक्टर के निर्देश के बाद हुई इस कार्रवाई से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अनियमितता करने वाले विक्रेताओं में हड़कंप की स्थिति है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि शासकीय राशन में हेराफेरी, गबन अथवा कालाबाजारी पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई और एफआईआर की जाएगी।

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